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राहुल के विरोध प्रदर्शन से खुफिया तंत्र की नाकामी साबित

किसी एजेंसी को इसकी भनक तक नहीं मिली

नेता और मीडिया तक को खबर थी

कवरेज के लिए पत्रकार भी जुट गये

पुलिस ने कहा जानकारी नहीं थी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित सरकारी आवास पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा अचानक किए गए गुप्त धरने और विरोध प्रदर्शन ने न सिर्फ सरकार और दिल्ली पुलिस को चौंका दिया, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों की तमाम गुप्तचर एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन और धरने को पूरी तरह से गुप्त रखने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपने लगभग 25 सांसदों तक को इसकी भनक नहीं लगने दी। सांसदों को केवल यह संदेश दिया गया था कि वे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10, राजाजी मार्ग स्थित आवास पर उनके जन्मदिन की बधाई देने के लिए एकत्र हों। प्रधानमंत्री आवास से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित इस स्थान पर जब सांसद पहुंचे, तब अंतिम क्षणों में उन्हें असली योजना की जानकारी दी गई।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की प्रमुख खुफिया एजेंसियों की विफलता को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि केंद्रीय और राज्य स्तर की तमाम खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां, जिनका काम इस तरह की संवेदनशील गतिविधियों पर नजर रखना है, पूरी तरह बेखबर कैसे रहीं? दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा तंत्र के नाक के नीचे प्रधानमंत्री आवास जैसे अति-सुरक्षित क्षेत्र में दर्जनों सांसद इकट्ठा होकर धरना दे देते हैं और एजेंसियों को भनक तक नहीं लगती। दूसरी तरफ मीडिया के लोगों को इसकी भनक थी लिहाजा वे कवरेज के लिए वहां पहुंच चुके थे।

यह घटना दर्शाती है कि सुरक्षा और गुप्तचर तंत्र का मूल काम—देश की सुरक्षा और संभावित खतरों या हलचलों का पूर्व-आकलन करना—अब मानों समाप्त हो चुका है। एजेंसियां अपनी पेशेवर निष्पक्षता खो चुकी हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि वे अब केवल शीर्ष सत्ता के राजनीतिक इशारों और व्यक्तिगत निर्देशों पर काम करने तक सीमित रह गई हैं। जनहित और अग्रिम सूचना (इंटेलिजेंस) जुटाने के बजाए उनका पूरा ध्यान राजनीतिक आकाओं के हुक्म का पालन करने पर केंद्रित हो गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक देखने को मिली।