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वांगचुक के धैर्य की परीक्षा ना ले सरकारः अन्ना हजारे

इतने दिनों की चुप्पी के बाद दूसरे सामाजिक कार्यकर्ता का बयान आया

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और जन लोकपाल आंदोलन के प्रणेता अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार से शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मांगों पर तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। शनिवार को दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद, अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सरकार को वांगचुक के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, सरकार को उनकी सीमाओं की परीक्षा लेना बंद करना चाहिए। आप उनकी मांगों पर हां कहें या ना कहें, लेकिन उनके साथ बैठकर बातचीत करने में क्या बुराई है? सरकार को तुरंत चर्चा की मेज पर आना चाहिए।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक घोटाले और परीक्षा प्रणाली में कथित धांधलियों के विरोध में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। शनिवार को उनके इस आमरण अनशन का 21वां दिन था, जिसके बाद उनके स्वास्थ्य में भारी गिरावट दर्ज की गई।

अन्ना हजारे की यह अपील बेहद मायने रखती है, क्योंकि यह देश के राजनीतिक इतिहास के उस दौर की याद दिलाती है जब साल 2011 में खुद हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल कानून की मांग को लेकर एक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी, जिसने तत्कालीन यूपीए सरकार की नींव हिलाकर रख दी थी। एक अनुभवी आंदोलनकारी के रूप में हजारे का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाज को अनसुना नहीं किया जाना चाहिए।

दूसरी तरफ, वांगचुक को अस्पताल ले जाने को लेकर दिल्ली पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच दावों का टकराव जारी है। जहाँ दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के तहत उठाया गया है जिसमें वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की बात कही गई थी, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पर्यावरण कार्यकर्ता को विरोध स्थल से जबरन और तानाशाही पूर्ण तरीके से उठाकर ले जाया गया है। इस बीच वांगचुक की पत्नी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि उनकी सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी इलाज न दिया जाए, जिससे प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच का यह गतिरोध और गहरा गया है।