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कारगिल में कांग्रेस को हराने की कोशिश में नया खेल

एनसी और भाजपा दोनों एक साथ आये

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः लद्दाख की राजनीति में एक बेहद महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। कारगिल स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद में मुख्य प्रतिद्वंद्वी दल माने जाने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस और भारतीय जनता पार्टी ने हाथ मिला लिया है। दोनों दलों के इस गठबंधन ने वर्तमान चेयरमैन डॉ. मोहम्मद जाफर अखून को उनके पद से हटाने की कांग्रेस की पुरजोर कोशिश को पूरी तरह विफल कर दिया है।

कांग्रेस द्वारा डॉ. अखून के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को बेअसर करते हुए, परिषद के 20 पार्षदों के समर्थन से बजट पारित कर दिया गया। यह राजनीतिक एकजुटता इसलिए हैरान करने वाली है क्योंकि पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में ये दोनों पार्टियां एक-दूसरे की घोर विरोधी हैं और लगातार तीखे बयानों का आदान-प्रदान करती रहती हैं।

कारगिल परिषद के मुख्य कार्यकारी परिषद अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद जाफर अखून नेशनल कॉन्फ्रेंस से ताल्लुक रखते हैं। इस साल मई महीने में कांग्रेस ने कुछ निर्दलीय पार्षदों और नेशनल कॉन्फ्रेंस के ही एक बागी गुट के समर्थन से डॉ. अखून के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद से ही कारगिल की स्थानीय राजनीति में लगातार अस्थिरता और खींचतान का माहौल बना हुआ था।

रिपोर्टों के अनुसार, मई में अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने के बाद से पहली बार परिषद का बजट पारित करने के लिए परिषद की एक विशेष बैठक बुलाई गई थी। इस महत्वपूर्ण सत्र में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सभी 12 पार्षदों ने हिस्सा लिया। उन्हें भाजपा के 6 सदस्यों, कांग्रेस के 1 सदस्य और 1 निर्दलीय पार्षद का भी साथ मिला।

कुल मिलाकर 20 पार्षदों ने एकजुट होकर बैठक में हिस्सा लिया और सर्वसम्मति से परिषद का बजट पारित कर दिया, जिसके कारण डॉ. अखून की कुर्सी पूरी तरह सुरक्षित हो गई। जम्मू-कश्मीर में जारी तनातनी के विपरीत, लद्दाख के इस रणनीतिक पहाड़ी क्षेत्र में भाजपा और नेकां का यह नया समीकरण क्षेत्र की राजनीतिक मजबूरी और कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की कवायद को दर्शाता है।