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पासपोर्ट सिर्फ देश से बाहर जाने का दस्तावेज

कई वरिष्ठ विधि विशेषज्ञों की टिप्पणी के बाद फिर वही बात

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट की वास्तविक कानूनी परिभाषा क्या है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट भारत सरकार द्वारा जारी किया गया एक ऐसा दस्तावेज है जिसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों के देश से बाहर प्रस्थान को विनियमित करना है।

प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह से स्थापित नियमों के तहत होती है। उन्होंने कहा, यह एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत उचित सत्यापन के बाद जारी किया जाता है। भारतीय नागरिकों या किसी अन्य व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करना पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 द्वारा शासित होता है। जायसवाल ने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्तमान में भारत की कुल आबादी के 8 प्रतिशत से भी कम नागरिकों के पास पासपोर्ट उपलब्ध है।

यह स्पष्टीकरण कुछ सप्ताह पहले सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिए गए उस बयान के बाद आया है, जिसमें पासपोर्ट को केवल एक यात्रा दस्तावेज बताया गया था और यह स्पष्ट किया गया था कि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

इस बयान का महत्व कानूनी दृष्टिकोण से अधिक है। अक्सर लोग पासपोर्ट को नागरिकता का प्राथमिक प्रमाण मान लेते हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के इस आधिकारिक रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पासपोर्ट का मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए सरकार से अनुमति प्राप्त करना और देश छोड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है। यह बयान उन भ्रांतियों को दूर करने के लिए दिया गया है जो समय-समय पर नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को लेकर आम जनता में बनी रहती हैं। यह स्पष्टीकरण भारतीय कानून के अंतर्गत पासपोर्ट की भूमिका को और अधिक पारदर्शी बनाता है।