Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
बापटला बीच पर मिला शिवलिंग पीठम और मूर्तियां; लहरों के साथ बहीं या जमीन से निकलीं? जांच में जुटा प्र... रीलबाजी की सनक पड़ी भारी: ग्वालियर में 3400 किस वाली कार का कटा चालान, मालिक से मौके पर साफ करवाए लि... वंदे मातरम् विवाद पर ओवैसी का बयान: 'संविधान की शुरुआत हम भारत के लोग से होती है', बीजेपी-कांग्रेस म... दिल्ली में ₹35 प्रति किलो बिकेगा प्याज: केंद्र सरकार ने चलाया 'कांदा एक्सप्रेस', NAFED और NCCF स्टोर... इस्लामाबाद के PIMS अस्पताल में भीषण आग: AC कंप्रेसर फटने से 15 नवजात बच्चों की जिंदा जलकर मौत, PM शह... बिना आंदोलन के भी यह काम हो सकता था मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मिले विदेश मंत्री जयशंकर बलात्कार के दोषी राम रहिम को 21 दिनों का फर्लो ऑनलाइन धतूरा बेच रहे कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई प्याज और चीनी के दाम सरकार पर अतिरिक्त बोझ

Bhojshala Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दोनों पक्ष धैर्य रखें, एएसआई की निगरानी में नमाज के लिए ओपन स्पेस देने का आदेश

मध्य प्रदेश के संवेदनशील भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया है। शीर्ष अदालत ने परिसर के पास मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आवेदक पक्ष के लिए एक ‘ओपन स्पेस’ (खुली जगह) की व्यवस्था करे, ताकि वे दोपहर 1 से 3 बजे के बीच शांतिपूर्वक नमाज अदा कर सकें।

🚫 एएसआई (ASI) को ढाँचे में बदलाव न करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने परिसर की यथास्थिति बनाए रखने की मांग की थी, ताकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) वहां किसी प्रकार का ढांचागत बदलाव न कर सके। इस पर चीफ जस्टिस (CJI) ने स्पष्ट किया कि एएसआई अदालत को सूचित किए बिना ढांचे में कोई भी बदलाव नहीं करेगा। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि धार्मिक कार्यों के दौरान दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के लिए कोई बाधा उत्पन्न न हो।

⚖️ शांति बनाए रखने की अपील

चीफ जस्टिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा, “हमें ऐसा कोई भी आदेश पारित करने से बचना चाहिए जिससे तनाव पैदा हो। यह एक अत्यंत संवेदनशील मामला है, इसलिए हमें हर शब्द का प्रयोग बेहद सावधानी से करना होगा।” कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई के लिए तीन हफ्ते का समय निर्धारित किया है।

🕰️ व्यवस्था अस्थायी, अंतिम फैसला अपील के नतीजे पर

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि नमाज को लेकर दी गई यह व्यवस्था पूरी तरह से ‘अस्थायी’ (Temporary) है। इस पूरे विवाद का अंतिम समाधान मुख्य अपील के अंतिम नतीजे पर ही निर्भर करेगा। कोर्ट ने कहा है कि विवाद का पूर्ण समाधान निकालने के लिए वे अंतिम सुनवाई के लिए भी तैयार हैं।