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सोने के रामचरित मानस पर पूर्व नौकरशाह का खुलासा

महीनों तक प्रदर्शन पर रखा, फिर चुपचाप वहां से हटा दिया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित दान घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन ने अपनी शिकायत सार्वजनिक कर दी है। उन्होंने मंदिर को लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस दान की थी। उन्होंने बताया कि कैसे लोगों द्वारा इसकी सुरक्षा को लेकर पूछे जा रहे सवालों ने उन्हें भी कुछ गंभीर सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया। पूर्व नौकरशाह ने कहा कि हालांकि शुरुआती समय में रामचरितमानस को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया गया था, लेकिन अब इसे वहां से हटा दिया गया है। मंदिर प्रशासन से बार-बार स्पष्टीकरण मांगने के प्रयासों के बावजूद, इस संबंध में अब तक कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला है।


श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि लगभग दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी लक्ष्मीनारायण की ओर से भेंट की गई सोने से युक्त श्रीरामचरितमानस सुरक्षित है। निर्धारित व्यवस्था के तहत रामचरितमानस को मंदिर के गूढ़ मंडप स्थित आभूषण कोठरी में सुरक्षित रख दिया गया। यह भेंट मंदिर के दान रजिस्टर में उसी समय दर्ज की गई थी। कहा कि श्री लक्ष्मीनारायण जब भी चाहें मंदिर आकर अपनी भेंट को देख सकते हैं।  रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है और उसके संबंध में किसी प्रकार की आशंका की आवश्यकता नहीं है। 


पूर्व गृह सचिव ने कहा कि सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस केवल एक उपहार नहीं थी, बल्कि यह उनके परिवार की एक लंबी आध्यात्मिक यात्रा का अंतिम परिणाम थी। उन्होंने बताया, रामचरितमानस मेरी दिवंगत मां की भक्ति का खजाना थी। उन्होंने अपने जीवन के लगभग 15 से 18 साल भगवान राम का नाम लिखने में बिताए। मेरा परिवार कई दशकों से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा रहा है। आंदोलन के लिए कन्याकुमारी से भेजी गई पहली ईंट मेरे ससुर के घर से आई थी। हम भगवान राम का परिवार हैं।

भगवान द्वारा उन्हें सेवानिवृत्त (रिटायर) होने की अनुमति देने के लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद, उन्हें लगा कि यह अपनी कमाई का कुछ हिस्सा भगवान राम की सेवा में समर्पित करने का समय है। उन्होंने कहा, सरकारी पेंशन मेरी जरूरतों के लिए पर्याप्त है। मैं बहुत सादा जीवन जीता हूं। मुझे लगा कि भगवान ने मुझे जो भी धन दिया है, वह उनकी सेवा में वापस जाना चाहिए।

लक्ष्मी नारायणन और उनकी पत्नी सरस्वती द्वारा राम मंदिर को दान की गई इस सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस की कीमत लगभग 4.5 करोड़ से 5 करोड़ रुपये है। यह पांडुलिपि सोना, चांदी और तांबे से बनी है और इसका वजन लगभग 147 किलोग्राम है। इसमें 522 सोने की परत चढ़े पन्ने हैं, जिन पर गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की सभी 10,902 चौपाइयां और छंद अंकित हैं। इसे अप्रैल 2024 में राम मंदिर ट्रस्ट को उपहार में दिया गया था। उन्होंने बताया कि हटाए जाने से पहले यह पांडुलिपि लगभग पांच महीने तक प्रदर्शन पर थी।

पूर्व नौकरशाह ने कहा कि हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ एक बैठक की। लक्ष्मीनारायणन ने कहा, वे बेहद विनम्र थे और उन्होंने मेरी समस्याओं को ध्यान से सुना। उन्होंने मेरी भक्ति की सराहना की और मुझसे वादा किया कि वे हर संभव तरीके से मेरी मदद करेंगे। हालांकि, कई बार फॉलो-अप करने के बाद भी आज तक कोई प्रगति न होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा, जिन लोगों ने इस मुद्दे को बार-बार उठाने में मेरी मदद की, उनका कहना है कि उनकी चिंताओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है।