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NADA Doping Bill 2026: डोपिंग अब बनेगा गंभीर अपराध, कोच और ड्रग सप्लायर को होगी 5 साल की जेल

केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में ‘राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी’ (NADA) से जुड़ा नया डोपिंग बिल-2026 संसद में पेश करने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य डोपिंग को मात्र खेल का एक उल्लंघन न मानकर इसे ‘अपराध’ की श्रेणी में लाना है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि डोपिंग अब केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक संगठित नेटवर्क बन चुकी है, जिसमें कोच, सप्लायर और कई बार चिकित्सा पेशेवर भी शामिल होते हैं।

⚖️ क्या हैं प्रस्तावित सख्त प्रावधान?

नए विधेयक के ड्राफ्ट के अनुसार, डोपिंग नेटवर्क से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को जवाबदेह बनाया जाएगा:

  • सजा का प्रावधान: प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति करने वालों के लिए 5 साल तक की कैद।

  • जुर्माना: डोपिंग में संलिप्त पाए जाने पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान।

  • डॉक्टरों की जिम्मेदारी: यदि कोई चिकित्सक जानबूझकर प्रतिबंधित पदार्थ की दवा लिखता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • संगठित तंत्र पर वार: खिलाड़ियों को डोपिंग के लिए उकसाने या उनसे संपर्क साधने वाले कोच और हॉस्टल प्रशासन को भी दायरे में लाया जाएगा।

🏅 ओलंपिक 2036 की मेजबानी और भारत की साख

भारत पिछले 3 वर्षों से WADA (विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी) की सूची में डोपिंग के मामले में शीर्ष पर बना हुआ है, जो देश के खेल जगत के लिए चिंताजनक है। चूंकि भारत 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए खेल मंत्री मनसुख मांडविया का मानना है कि डोपिंग के इस संगठित तंत्र को जड़ से खत्म करना अनिवार्य है। यह नया बिल 2018 और 2022 के प्रयासों का अधिक उन्नत और व्यापक संस्करण है।

📢 जन भागीदारी और पारदर्शिता

खेल मंत्रालय ने इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले जनता और सभी हितधारकों (Stakeholders) से सुझाव मांगे थे। खेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि डोपिंग खिलाड़ियों का शोषण करने वाला एक संगठित अपराध है, जिसे अब और अधिक बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मानसून सत्र में इस बिल के पेश होने से भारतीय खेल जगत में पारदर्शिता और ईमानदारी का एक नया दौर शुरू होने की उम्मीद है।