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उग्र भीड़ ने इबोला उपचार केंद्र को फूंका दिया

पूर्वी कांगों में अचानक हुए हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत

एजेंसियां

इतुरी: प्रजातांत्रिक गणराज्य कांगो के पूर्वी हिस्से में एक उग्र भीड़ ने इबोला उपचार केंद्र को आग के हवाले कर दिया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस हिंसक हमले में एक पुलिस अधिकारी की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी जोसेफ पेमामाकुवे ने बताया कि इतुरी प्रांत के बाफ़वाबैंगो गांव में स्थित इस केंद्र पर हमले के बाद, इबोला के कई पुष्ट मरीज और इस जानलेवा वायरस के लक्षण दिखाने वाले संदिग्ध लोग जान बचाकर केंद्र से भाग गए।

पेमामाकुवे के अनुसार, नाराज स्थानीय युवाओं के एक समूह ने इबोला के एक संदिग्ध पीड़ित के सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से किए जाने वाले अंतिम संस्कार को रोकने की कोशिश की थी, जबकि मृतक के परिवार ने इस अंतिम संस्कार के लिए पहले ही अपनी मंजूरी दे दी थी।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी जोसेफ पेमामाकुवे ने दुख जताते हुए कहा, उपचार केंद्र का सब कुछ जलकर खाक हो गया है। वहां फिलहाल स्वास्थ्य सेवाएं और ऑपरेशन दोबारा शुरू नहीं हो पाए हैं, क्योंकि हमारा मेडिकल स्टाफ अभी भी अपनी सुरक्षा को लेकर गहरे डर में है।

पूर्वी कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि स्थानीय समुदायों के बीच फैला अविश्वास और अफवाहें राहत एवं बचाव कार्यों में बड़ी बाधा बन रही हैं। इस बीमारी को लेकर फैले डर, अंधविश्वास और झूठी अफवाहों के माहौल के बीच राहत कर्मियों और स्वास्थ्य केंद्रों पर पहले भी लगातार हमले होते रहे हैं। कांगो में पारंपरिक अंतिम संस्कार की प्रथाएं, जिनमें शव के साथ बेहद करीबी शारीरिक संपर्क शामिल होता है, इस वायरस के तेजी से फैलने और संक्रमण का एक बहुत बड़ा जरिया बनी हुई हैं।

नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल महीने से शुरू हुए प्रकोप के बाद से अब तक कम से कम 399 लोगों की इबोला से मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रयोगशाला जांच (लैब टेस्टिंग) के माध्यम से अब तक संक्रमण के 1,333 मामलों की पुष्टि की है।

हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि संक्रमितों की वास्तविक संख्या इस आंकड़े से कहीं अधिक होने की संभावना है, क्योंकि शुरुआत में कई हफ्तों तक इस महामारी के फैलने का पता ही नहीं चल पाया था। यह संकट अब केवल कांगो तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पड़ोसी देश युगांडा में भी इबोला संक्रमण के 20 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जिससे इस वायरस के क्षेत्रीय स्तर पर फैलने का खतरा बढ़ गया है।