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स्टालिन सरकार भ्रष्टाचार से घिरी हुई थीः वायको

गठबंधन से बाहर होने के बाद एमडीएमके नेता के तीखे बोल

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः एमडीएमके प्रमुख वायको ने डीएमके के साथ अपने नौ साल पुराने गठबंधन से अलग होने के कुछ दिनों बाद ही पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को तिरुपुर में पत्रकारों से बात करते हुए वायको ने एम.के. स्टालिन के कार्यकाल को भ्रष्टाचार और कमीशन से भरा हुआ करार दिया। वायको ने 27 जून को डीएमके नीत गठबंधन छोड़ने की औपचारिक घोषणा की थी और अब उन्होंने अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को अपना समर्थन देने की पुष्टि की है।

जब पत्रकारों ने वायको से यह तीखा सवाल किया कि यदि डीएमके का शासन भ्रष्टाचार से युक्त था, तो वे पाँच वर्षों तक गठबंधन का हिस्सा क्यों बने रहे? इस पर वायको ने गठबंधन धर्म का हवाला देते हुए सफाई दी। उन्होंने कहा, गठबंधन में रहते हुए मैं उसकी आलोचना कैसे कर सकता था? उनका तर्क था कि उस दौरान उन्होंने मर्यादा का पालन किया, लेकिन गठबंधन से बाहर आने के बाद वे जनता के सामने सच रखने के लिए स्वतंत्र हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब एक पत्रकार ने वायको से उनके अतीत के बारे में कुछ निजी सवाल पूछे। इससे वायको बुरी तरह भड़क गए और पत्रकार की निष्ठा पर सवाल उठाते हुए उनके प्रकाशन को पीत पत्रकारिता करार दिया। गुस्से में आकर वायको ने पत्रकार को कार्यक्रम स्थल से बाहर जाने के लिए कहा। इस दौरान वायको और पत्रकार के बीच तीखी नोकझोंक हुई और स्थिति तब और बिगड़ गई जब एमडीएमके के कार्यकर्ताओं ने पत्रकार को घेर लिया, जिसके चलते प्रेस कॉन्फ्रेंस को अचानक समाप्त करना पड़ा।

वायको का यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरणों की ओर संकेत करता है। टीवीके को समर्थन देकर वायको ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की राजनीति में अब वे एक नई भूमिका की तलाश में हैं। हालाँकि, उनके इस यू-टर्न पर विपक्षी दलों और जनता के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद भ्रष्टाचार के आरोप लगाना एक पुरानी राजनीतिक चाल है। यह विवाद आने वाले समय में तमिलनाडु में राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज कर सकता है, जहाँ गठबंधन बदलने का इतिहास बहुत पुराना रहा है।