जलवायु परिवर्तन की वजह से पूरे यूरोप में भीषण गर्मी
एजेंसियां
पेरिसः यूरोप इस समय भीषण गर्मी की लहर (हीट वेव) की चपेट में है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। भीषण गर्मी से राहत पाने की उम्मीद में ठंडे पानी की तलाश कर रहे लोगों के लिए यह मौसम जानलेवा साबित हो रहा है। फ्रांस में पिछले एक सप्ताह के भीतर डूबने से 40 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई है।
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने जानकारी दी कि इन मृतकों में अधिकांश युवा हैं। फ्रांस की खेल और युवा मंत्री मरीना फेरारी ने रेडियो साक्षात्कार में चेतावनी देते हुए कहा कि भीषण गर्मी के दौरान बिना निगरानी वाले क्षेत्रों में तैरने जाना जान जोखिम में डालना है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
फ्रांस के मौसम विभाग मेटियो फ्रांस के अनुसार, गर्मी का यह प्रकोप फिलहाल थमने वाला नहीं है और स्थिति कम से कम इस सप्ताह के अंत तक बनी रहने की संभावना है। कई शहरों में दिन का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट (40 डिग्री सेल्सियस) को पार कर गया है। फ्रांस में एयर कंडीशनिंग की व्यापक सुविधा न होने के कारण स्कूलों, सार्वजनिक परिवहन और खेल आयोजनों पर गहरा असर पड़ा है। पेरिस में पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र, जैसे एफिल टॉवर और लौवर संग्रहालय ने अपने समय में बदलाव किया है। लौवर संग्रहालय ने बुधवार से शनिवार तक सामान्य समय से दो घंटे पहले बंद रहने का निर्णय लिया है।
देश का राष्ट्रीय थर्मल इंडिकेटर 85.6 डिग्री फारेनहाइट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर है। फ्रांस ने सोमवार को जून महीने के लिए अपना सबसे गर्म दिन और अब तक की सबसे गर्म रात दर्ज की है। गर्मी का यह स्तर 2003 की उस विनाशकारी हीट वेव की याद दिलाता है, जिसमें लगभग 15,000 लोगों की जान चली गई थी।
केवल फ्रांस ही नहीं, बल्कि इटली, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम जैसे अन्य यूरोपीय देश भी भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। स्पेन में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की रिपोर्टें चेतावनी देती हैं कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है। 1980 के दशक के बाद से यहां तापमान वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में ऐसे भीषण मौसम की घटनाएं और अधिक बार होंगी, जिससे जनजीवन को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।