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लाल सलाद पत्ता को हरा बनाया गया

जेनेटिक्स में बदलाव का नया परिणाम देखा वैज्ञानिकों ने

  • इस पत्ते के सेवन में अनेक फायदे होते हैं

  • सिर्फ एक जीन को निष्क्रिय किया था

  • रंग के अलावा गुणों में बदलाव नहीं हुआ

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हाल ही में हुए एक वैज्ञानिक शोध में शोधकर्ताओं ने जिनोम एडिटिंग के माध्यम से लाल सलाद पत्ते (रेड लीफ लेटुस) के रंग को बदलकर उसे हरा कर दिया। इस प्रक्रिया के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला परिणाम सामने आया, जिसने वनस्पति विज्ञान की दुनिया में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं।

लाल रंग का रहस्य और आनुवंशिक बदलाव लाल सलाद पत्ते का आकर्षक लाल रंग एंथोसायनिन नामक वर्णकों के कारण होता है। ये एंटीऑक्सीडेंट गुणों वाले पॉलीफेनोल पिगमेंट हैं। पौधे इन्हें फेनिलएलनिन नामक अमीनो एसिड से शुरू होने वाली एंजाइम-संचालित प्रतिक्रियाओं की एक श्रृंखला के माध्यम से बनाते हैं। इस प्रक्रिया में फ्लेवोनोइड्स नामक यौगिकों का निर्माण होता है, जो एंथोसायनिन में बदलने से पहले कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

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इसे अब जेनेटिक्स के क्षेत्र में बिल्कुल नये किस्म के प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही जेनेटिक्स से जुड़े वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में दूसरी वनस्पतियों के साथ भी ऐसा प्रयोग कर उनमें बदलाव लाया जा सकता है क्योंकि यह पहला प्रयोग सफल साबित हुआ है।

वैज्ञानिकों ने डाइहाइड्रोफ्लेवोनोल 4-रिडक्टेस नामक एंजाइम का उत्पादन करने वाले जीन को बंद कर दिया। यह एंजाइम एंथोसायनिन बनने के अंतिम चरणों में से एक के लिए जिम्मेदार होता है। जैसे ही इस जीन को निष्क्रिय किया गया, लाल सलाद पत्ते ने अपना स्वाभाविक लाल रंग खो दिया और वह हरा हो गया

बढ़ी पोषक तत्वों की मात्रा शोध का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब वैज्ञानिकों ने हरे किए गए इन पत्तों का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि एंथोसायनिन का उत्पादन रुकने के कारण पौधे की बायोकेमिकल ऊर्जा दूसरी दिशा में मुड़ गई। इसके परिणामस्वरूप, क्वेरसेटिन सहित अन्य कई महत्वपूर्ण फ्लेवोनोइड्स की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि इस आनुवंशिक बदलाव का पौधे की वृद्धि दर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। यह साबित करता है कि पौधों की उत्पादकता से समझौता किए बिना उनके पोषण प्रोफाइल को बदला जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में प्लांट फैक्ट्री या इनडोर खेती के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। चूँकि फ्लेवोनोइड उत्पादन प्रकाश और तापमान के प्रति संवेदनशील होता है, इसलिए इनडोर खेती में नियंत्रित वातावरण का उपयोग करके विशिष्ट पोषक तत्वों से भरपूर सलाद पत्तों की नई किस्में विकसित की जा सकती हैं। यह तकनीक न केवल स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहतर फसलों के उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेगी, बल्कि भविष्य में नियंत्रित कृषि प्रणाली को भी मजबूती प्रदान करेगी।

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