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डोनाल्ड ट्रम्प के आठ साल पुराने फैसले को बदलने पर राय

यह क्वाड के ताबूत में आखिरी कील हैः शशि थरूर

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर पुनः यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। यह आठ साल पहले लिए गए उस निर्णय को पलटने जैसा है, जिसे उस समय भारत के बढ़ते रणनीतिक महत्व के सम्मान के रूप में देखा गया था। अमेरिकी युद्ध विभाग ने कहा है कि यह नाम परिवर्तन कमांड की 1947 में तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन द्वारा स्थापित ऐतिहासिक विरासत और पहचान को बहाल करने के लिए किया गया है।

इस घटनाक्रम ने भारत में गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों और राजनेताओं का मानना है कि कमांड के नाम से इंडो शब्द को हटाना वाशिंगटन की इंडो-पैसिफिक रणनीति में बदलाव और क्वाड (ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका) जैसे समूहों की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगा सकता है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, क्या यह क्वाड के ताबूत में आखिरी कील है? उन्होंने युद्ध विभाग द्वारा जारी आदेश का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। हालाँकि, अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि यह केवल एक नामकरण परिवर्तन है और कमांड की संरचना, जिम्मेदारियों और क्षेत्रीय प्रतिबद्धताओं में कोई बदलाव नहीं आया है। उनका कहना है कि कमांड का कार्यक्षेत्र अभी भी अमेरिकी पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला हुआ है।

यह बदलाव 2018 में डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान किए गए उस फैसले को उलटता है, जिसमें क्षेत्र की बढ़ती रणनीतिक अहमियत और हिंद महासागर व प्रशांत महासागर के बीच बढ़ते जुड़ाव को दर्शाने के लिए इंडो-पैसिफिक नाम अपनाया गया था। हवाई में स्थित यह कमांड प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया के बड़े हिस्सों में रणनीतिक सुरक्षा का प्रबंधन करता है।

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब फ्रांस में जी 7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाकात होने वाली है। विश्लेषकों का मानना है कि इस नामकरण ने भारत-अमेरिका संबंधों के उस उत्साही दौर पर सवाल खड़ा कर दिया है, जो पिछले कुछ वर्षों में उभरा था।