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राम मंदिर चंदा पर तीन सदस्यीय कमेटी

सोशल मीडिया पर भारी बवाल के बाद सरकार सक्रिय

  • वीडियो में बताया था पूरा कारोबार

  • मामले की दबाने की पूरी कोशिश हुई

  • राजनीतिक विवाद के बाद जांच प्रारंभ

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिलने वाले दान और उसके वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन कर दिया है। राज्य के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर लिया गया है। इस कदम का उद्देश्य पूरे मामले में व्याप्त संशय को दूर करना और वित्तीय पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है।

इस एसआईटी में तीन अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो इस जटिल मामले की बारीकी से जांच करेंगे। टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को नियुक्त किया गया है। यह एसआईटी ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, दान की प्राप्तियों और व्यय के ब्योरे का व्यापक ऑडिट और विश्लेषण करेगी।

विवाद की शुरुआत इस महीने की शुरुआत में हुई, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर एकत्र किए गए करोड़ों रुपयों के दान में हेराफेरी हुई है। उन्होंने इस मुद्दे को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील करार देते हुए न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट और राज्य सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए थे।

इन आरोपों का खंडन करते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया था कि मंदिर ट्रस्ट में आंतरिक ऑडिट की प्रक्रिया निरंतर चल रही है और अब तक के जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का कोई साक्ष्य सामने नहीं आया है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के प्रतिनिधि और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी समय-समय पर खातों की ऑडिट कर रहे हैं। ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त किया और कहा कि सरकार द्वारा गठित किसी भी जांच का वे स्वागत करेंगे।

हालाँकि, यह विवाद थमने के बजाय और तूल पकड़ता गया। पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी एक विवादास्पद बयान देते हुए दावा किया कि उन्हें दान के कथित दुरुपयोग की जानकारी है, लेकिन उन्होंने विस्तार से कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। इसके अतिरिक्त, वरिष्ठ भाजपा नेता रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट के वित्त, परिसंपत्तियों, प्राप्त दान, खर्च और भूमि सौदों का सार्वजनिक प्रकटीकरण करने की मांग की। रजनीश सिंह का तर्क है कि जिन श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक मंदिर निर्माण में अपना योगदान दिया है, उन्हें यह जानने का पूर्ण अधिकार है कि उनके द्वारा दिए गए धन, आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है। अब एसआईटी की रिपोर्ट से ही इस पूरे विवाद की वास्तविकता स्पष्ट हो पाएगी।