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चिली में साढ़े छह सौ फीट का सिंकहोल बना

जानकारों ने इस घटना के खनन आपदा करार दिया

सेंटियागोः हाल ही में रेडिट पर वायरल हुई एक तस्वीर ने दुनिया की सबसे अजीबोगरीब खनन आपदाओं में से एक की ओर फिर से ध्यान आकर्षित किया है। इस तस्वीर में चिली के रेगिस्तान के बीचों-बीच बना एक लगभग पूर्ण गोलाकार गड्ढा दिखाई दे रहा है, जो जमीन के अंदर 650 फीट से अधिक गहराई तक चला गया है। यह दृश्य भले ही किसी कंप्यूटर ग्राफिक्स या फिल्म का हिस्सा लगे, लेकिन जांचकर्ताओं ने पाया कि यह वास्तविकता में एक गंभीर खनन आपदा का परिणाम था।

यह घटना 2022 में चिली के अटाकामा क्षेत्र के टिएरा अमरीला में अल्कापरोसा तांबा खदान के पास हुई थी। चिली की भूवैज्ञानिक एजेंसी, सेरनागेओमरीन ने पुष्टि की कि यह भू-धंसाव कनाडाई कंपनी लंडिन माइनिंग द्वारा संचालित क्षेत्र में हुआ था। एजेंसी के निदेशक डेविड मोंटेनेग्रो ने बताया कि जमीन की सतह से नीचे तक की गहराई लगभग 200 मीटर (656 फीट) है, जहाँ काफी मात्रा में पानी देखा गया है।

बाद की जांच में यह खुलासा हुआ कि अल्कापरोसा खदान में चल रहे खनन कार्यों ने जमीन के नीचे एक विशाल खाली जगह बना दी थी, जो अंततः ढह गई। इस घटना के बाद लंडिन माइनिंग के कार्यों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया और कंपनी पर जुर्माना भी लगाया गया। घटना के तीन साल बाद भी, 2025 में, यह विशाल सिंकहोल भरा नहीं गया है, और अदालत पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए संघर्ष कर रही है।

स्थानीय निवासियों में इस सिंकहोल को लेकर गहरा डर व्याप्त है। यहाँ से 800 मीटर की दूरी पर रहने वाले रूडी अलफारो ने बताया कि इस घटना के बाद से वे निरंतर भय में जी रहे हैं, क्योंकि पास में ही एक स्वास्थ्य केंद्र और प्री-स्कूल भी स्थित है। उन्हें डर है कि यह गड्ढा भविष्य में और अधिक फैल सकता है और घरों को अपनी चपेट में ले सकता है।

यह मामला केवल एक भूवैज्ञानिक घटना नहीं, बल्कि भूमिगत खनन के खतरों के प्रति एक बड़ी चेतावनी है। जब जमीन के नीचे के हिस्से ढहते हैं, तो खतरा केवल खदान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आसपास की भूमि, बुनियादी ढांचे और भूजल को भी प्रभावित कर सकता है। यह घटना दर्शाती है कि खराब प्रबंधन वाली खनन गतिविधियां किस प्रकार पर्यावरण के लिए घातक हो सकती हैं, जहाँ जमीन के अंदर की समस्याएं तब तक अदृश्य रहती हैं, जब तक कि सतह अचानक धंस नहीं जाती।