West Bengal Political Crisis: टीएमसी में फूट! काकोली घोष दस्तीदार और शत्रुघ्न सिन्हा समेत 19 सांसदों ने उठाए बागी तेवर
पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर दी है और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को हस्ताक्षरित पत्र सौंप दिया है। इस बगावत के बाद ममता बनर्जी के साथ केवल 9 लोकसभा सांसद ही बचे बताए जा रहे हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में हड़कंप मच गया है।
👤 कौन हैं बागी सांसदों के खेमे में?
बागी सांसदों का यह गुट काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एनडीए को समर्थन देने की चर्चा कर रहा है। इस सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें सयानी घोष, अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। कुल 19 सांसदों के इस खेमे ने टीएमसी की संगठनात्मक एकता को बड़ी चुनौती दी है।
📋 19 बागी सांसदों की सूची
बागी हुए सांसदों में प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
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काकोली घोष दस्तिदार (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), सायोनी घोष (जादवपुर), माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), मिताली बाग (आरामबाग), दीपक अधिकारी/देव (घाटाल), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुरा), डॉ. शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), असित कुमार माल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम) और रचना बनर्जी (हुगली)।
📉 ममता के साथ बचे सांसदों की स्थिति
टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के साथ अब केवल 9 सांसद ही शेष बचे हैं, जिनमें अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद, सौगत रॉय, कल्याण बनर्जी और शताब्दी रॉय जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी बचे हुए सांसदों के साथ लगातार बैठकें कर आगे की रणनीति तैयार कर रही हैं। इसी क्रम में उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से भी मुलाकात की है, जबकि अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से चर्चा की है।
⚖️ विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ती मुश्किलें
बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ता गया। पहले विधायकों ने साथ छोड़ा और अब सांसदों की बगावत ने पार्टी की नींव हिला दी है। हालांकि टीएमसी कैंप का एक बड़ा हिस्सा इन नेताओं के बने रहने का दावा करता था, लेकिन 19 सांसदों की इस बगावत ने ममता बनर्जी के लिए बड़े राजनीतिक संकट के संकेत दे दिए हैं।