Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
नागपंचमी पर आस्था का महासैलाब: नागलवाड़ी भिलट देव में 4 लाख भक्तों ने टेका मत्था; महाकाल पहुंचे क्रि... निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस ने कसी कमर: भोपाल से शुरू हुआ 'बेहतर सिटी अभियान', वार्ड-वार्ड जाकर उठाए... सड़क हादसे के बाद AIIMS भोपाल में युवक हुआ ब्रेन-डेड, परिजनों ने लिया अंगदान का फैसला छिंदवाड़ा में खाद वितरण पर लगी अंतरिम रोक: धांधली के आरोपों के बीच किसानों का चक्काजाम, स्टॉक सत्याप... छिंदवाड़ा: सावन-भादों में पलाश के पत्तों से जीवंत हो रही सदियों पुरानी परंपरा, आजीविका और आस्था का अ... श्योपुर के रघुनाथपुर में स्कूल की छत भरभराकर गिरी, शाम का समय होने से टला बड़ा हादसा ग्वालियर SP ऑफिस में कांग्रेस जिला महामंत्री राजेश किरार ने खाया जहर, अस्पताल में मौत; सुसाइड नोट मे... हथियार ढूंढने गई थी पुलिस, अलमारी से निकला 3 करोड़ रुपयों का अंबार; नोट गिनने के लिए मंगवानी पड़ी मश... उज्जैन नागचंद्रेश्वर मंदिर में करंट की अफवाह से मची भगदड़: बैरिकेडिंग टूटने से कई श्रद्धालु घायल, चर... एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा केस में CBI की 636 पेज की चार्जशीट, पति समर्थ और सास पर दहेज हत्या का केस

ईसाइयों को आदिवासी सूची से बाहर करने की मांग

देश की राजधानी में बड़ी रैली के बाद सुलग रही है आग

  • आरएसएस की तरफ से था आयोजन

  • उसके बाद से देश भर में प्रचार जारी है

  • दूरस्थ इलाकों तक इसका असर पहुंचा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक संगठन के नेतृत्व में अब देश के ईसाई धर्म अपना चुके आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने की मांग तेज हो गई है। इसी सिलसिले में, भारत भर के अनुसूचित जनजाति समुदायों के लाखों सदस्यों ने नई दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर एक विशाल सभा का आयोजन किया। यह जनसैलाब जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में हिस्सा लेने के लिए देश के कोने-कोने से जुटा था।

दिखावे के तौर पर इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन महान क्रांतिकारी और आदिवासी महानायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था। कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार और आधिकारिक सामग्रियों में भी यही कहा गया था कि इस समागम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी संस्कृति, परंपराओं, धार्मिक प्रथाओं और उनकी मूल पहचान का संरक्षण व सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यद्यपि मंच से आदिवासियों के गौरवमयी इतिहास और जल-जंगल-जमीन की रक्षा की बातें की गईं, लेकिन इस पूरे समागम का मुख्य और अंतर्निहित एजेंडा उन आदिवासियों को निशाना बनाना था जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है। संघ समर्थित जनजाति सुरक्षा मंच लंबे समय से देश भर में यह मुहिम चला रहा है कि जो आदिवासी अपनी मूल सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को छोड़कर किसी अन्य संगठित धर्म (विशेषकर ईसाई या इस्लाम) में परिवर्तित हो चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति को मिलने वाले आरक्षण और अन्य संवैधानिक लाभों से तुरंत वंचित किया जाना चाहिए।

संगठन का तर्क है कि आरक्षण का लाभ केवल उन मूल आदिवासियों को मिलना चाहिए जो अपनी पारंपरिक पद्धतियों, प्रकृति पूजा और रूढ़िगत संस्कृति का पालन कर रहे हैं। उनके अनुसार, धर्म परिवर्तन करने के बाद भी आदिवासी दर्जे का लाभ उठाना उन गरीब और मूल आदिवासियों के अधिकारों का हनन है जो आज भी अपनी परंपराओं को सहेज कर रख रहे हैं। लाल किले पर हुआ यह समागम इसी मांग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है, जिसने देश के जनजातीय क्षेत्रों में एक नई सामाजिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है।