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ग्रेट निकोबार परियोजना सिर्फ अडाणी के लिएः राहुल गांधी

समुद्र की गहराई में छलांग लगाने के बाद निकले नेता प्रतिपक्ष

  • अपने अप्रैल दौरे का वीडियो जारी किया

  • सेना का सिर्फ बहाना बना रही सरकार

  • पर्यावरण और स्थानीय लोगों को नुकसान

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक डिजिटल अभियान लालच पर हरियाली को चुनना की शुरुआत करते हुए उन्होंने इस मेगा प्रोजेक्ट को रक्षा नहीं, बल्कि निजी व्यावसायिक हितों को साधने वाला करार दिया।

राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीपों की अपनी अप्रैल यात्रा के अनुभवों के आधार पर 16 मिनट का एक वीडियो जारी किया। वीडियो में उन्होंने तर्क दिया कि मोदी सरकार द्वारा बार-बार दोहराया जा रहा रणनीतिक रक्षा का दावा महज एक झूठ है। गांधी ने कहा, यदि सरकार को वास्तव में रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है, तो वे पहले से मौजूद आईएनएस बाज नौसैनिक एयर स्टेशन का विस्तार क्यों नहीं कर रहे? कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करेगी। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि सरकार अपनी असली मंशा छिपाने के लिए सेना का कवच ले रही है।

परियोजना की भयावहता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इस विकास के नाम पर 1.5 करोड़ से अधिक प्राचीन वृक्षों को काटा जाएगा, जिससे वहां के वर्षावन नष्ट हो जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित टाउनशिप, होटल और कैसीनो का क्षेत्र नई दिल्ली के आकार से कई गुना बड़ा है। राहुल गांधी के अनुसार, यह परियोजना न केवल कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) को मानचित्र से मिटा देगी, बल्कि स्थानीय जनजातीय समुदायों और वहां के पर्यावरण के लिए अभिशाप साबित होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन कर आदिवासियों की भूमि छीनी जा रही है और उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है।

राहुल ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन वे पर्यावरण के साथ संतुलन बनाने वाले विकास के पक्षधर हैं। उन्होंने ग्रेट निकोबार को टिकाऊ पर्यटन और संरक्षण के वैश्विक मॉडल के रूप में विकसित करने की वकालत की। उन्होंने देश के युवाओं से इस ऑनलाइन याचिका से जुड़ने का आग्रह करते हुए पूछा कि वे कैसी विरासत चाहते हैं—जहाँ विकास के नाम पर जंगल और आदिवासियों के घर उजाड़ दिए जाएं, या जहाँ प्रगति और प्रकृति का सह-अस्तित्व बना रहे। यह परियोजना अब देश में विकास बनाम पर्यावरण के मुद्दे पर एक नई बहस को जन्म दे चुकी है।