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समुद्र के नीचे बिछे केबलों की सुरक्षा पर सतर्कता

यूक्रेन युद्ध प्रारंभ होने के बाद से ही सुरक्षा की चिंता बढ़ी

  • इंटरनेट का प्रवाह इन पर निर्भर

  • स्वचालित वाहनों से निगरानी होगी

  • होर्मुज के मुद्दे पर भी शीघ्र फैसला

एजेंसियां

लंदनः हाल के दिनों में, समुद्र के नीचे स्थित संचार केबलों और पाइपलाइनों को तोड़फोड़ से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहल शुरू की गई है। ऑस्ट्रेलिया, यूके और अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा के लिए एक संयुक्त रणनीति पर सहमति व्यक्त की है।

ऑस्ट्रेलिया, यूके, यूएस के गठबंधन ने समुद्र के नीचे काम करने वाले स्वायत्त वाहनों को विकसित करने का एक नया कार्यक्रम शुरू किया है। 2027 तक इन ड्रोन का उपयोग निगरानी, टोही और पनडुब्बी-रोधी युद्ध कौशल को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। ये ड्रोन समुद्र के नीचे की गतिविधियों का पता लगाने और खतरों को रोकने में सक्षम होंगे।

इन देशों के रक्षा मंत्रियों का मानना है कि समुद्र का तल अब एक नया युद्धक्षेत्र बन चुका है। चूंकि दुनिया का 99 प्रतिशत से अधिक अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट डेटा और बड़ी मात्रा में बिजली आपूर्ति इन्हीं आधुनिक सभ्यता की धमनियों के माध्यम से होती है, इसलिए इनकी सुरक्षा वैश्विक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले डेटा केबलों पर पारगमन शुल्क या डिजिटल टोल लगाने का प्रस्ताव दिया है।  होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20 फीसद डेटा प्रवाह को ले जाने वाले केबलों का मार्ग है। ईरान का तर्क है कि चूंकि यह बुनियादी ढांचा उसके जलक्षेत्र के करीब है, इसलिए वह इसे मुद्रीकृत कर सकता है।

यदि ईरान इस योजना को लागू करता है, तो यह वैश्विक टेक कंपनियों (जैसे गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न) के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इसे आर्थिक लाभ और अमेरिका के खिलाफ रणनीतिक दबाव बनाने के एक साधन के रूप में देख रहा है।  यह स्थिति इस बात को रेखांकित करती है कि डिजिटल युग में भी वैश्विक संचार और अर्थव्यवस्था भौतिक बुनियादी ढांचे पर निर्भर है, जो अब भू-राजनीतिक संघर्षों का नया केंद्र बन गया है।