Narayanpur News: नारायणपुर के उसेबेड़ा में ग्रामीणों ने खुद ढहाया वर्षों पुराना नक्सल स्मारक, माड़ मैत्री अभियान की बड़ी सफलता
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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर माड़ क्षेत्र में सुरक्षा बलों और प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ‘माड़ मैत्री अभियान’ के तहत ग्राम उसेबेड़ा में एक भव्य जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस विशेष अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने खुलकर अपनी बुनियादी समस्याएं साझा कीं. कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि गांव में वर्षों से मौजूद नक्सली स्मारक को ग्रामीणों की आपसी सहमति और सक्रिय सहभागिता से पूरी तरह हटा दिया गया. इसके साथ ही, शिविर में ग्रामीणों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के साथ-साथ शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी पहुंचाई गई.
🛡️ वनांचल और दूरस्थ गांवों तक पहुंचा ‘माड़ मैत्री’ का संदेश
नारायणपुर पुलिस अधीक्षक (SP) रॉबिंसन गुड़िया के सख्त निर्देश पर और 41वीं वाहिनी आईटीबीपी (ITBP) के कमांडेंट बेनुधर नायक के कुशल मार्गदर्शन में इस संवेदनशील इलाके में माड़ मैत्री अभियान चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में ग्राम उसेबेड़ा में जिला पुलिस और आईटीबीपी की संयुक्त टीम ने ग्रामीणों का विश्वास जीतने के लिए एक प्रभावी जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष और बुजुर्ग शामिल हुए.
💧 घोटुलपारा में गहराया पेयजल का संकट, अधिकारियों ने दिया समाधान का आश्वासन
जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने अपनी रोज़मर्रा की दिक्कतों को अधिकारियों के सामने रखा, जिसमें विशेष रूप से घोटुलपारा क्षेत्र में व्याप्त पेयजल (पीने के पानी) के गहरे संकट की समस्या प्रमुखता से उठाई गई. ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पर्याप्त पेयजल सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें पानी के लिए दूर दराज के जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस समस्या के त्वरित समाधान के लिए संबंधित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) से बात कर आवश्यक कार्यवाही कराने का पुख्ता आश्वासन दिया.
🔨 विकास के आगे झुका उग्रवाद: ग्रामीणों ने खुद किया नक्सल स्मारक को जमींदोज
इस दौरान ग्राम उसेबेड़ा में लंबे समय से स्थापित नक्सली स्मारक को भी कार्यक्रम के अंतर्गत पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया. वर्षों से माड़ की धरती पर भय के प्रतीक के रूप में मौजूद इस स्मारक को ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों के सहयोग से खुद अपने हाथों से ढहा दिया. इस कदम के जरिए ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से बस्तर में शांति, चहुंमुखी विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया. ग्रामीणों का साफ कहना था कि क्षेत्र के विकास, बच्चों की शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और सड़कों जैसी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए इलाके में शांति का वातावरण होना पहली शर्त है.
💊 जरूरतमंदों के लिए निशुल्क दवा वितरण और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर
माड़ मैत्री कार्यक्रम के दौरान अंदरूनी क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया. इस दूरस्थ क्षेत्र के जरूरतमंद ग्रामीणों का डॉक्टरों की टीम द्वारा निशुल्क हेल्थ चेकअप किया गया और मौसमी व सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए आवश्यक दवाइयों का मुफ्त वितरण किया गया. स्वास्थ्य संबंधी जरूरी परामर्श देकर डॉक्टरों ने लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता, मलेरिया से बचाव और नियमित स्वास्थ्य जांच के प्रति भी जागरूक किया.
इसके अलावा, शिविर में ग्रामीणों को छत्तीसगढ़ शासन की विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारी दी गई. अधिकारियों ने उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, पेंशन, पीएम आवास और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेने के लिए फॉर्म भरने हेतु प्रेरित किया. ग्रामीणों को समझाया गया कि इन सरकारी योजनाओं का अंतिम उद्देश्य सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक विकास की मुख्यधारा को पहुंचाना है.