Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Ramgarh Sadar Hospital Fire: रामगढ़ सदर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में लगी भीषण आग; AC ब्लास्ट के बाद म... Agriculture News: साहिबगंज के किसानों के लिए राहत भरी खबर; मानसून सक्रिय, धान बीज वितरण और सुखाड़ से... Constitution Murder Day: बोकारो में बीजेपी ने मनाया 'संविधान हत्या दिवस'; बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस... Palamu News: पोखराहा में पुलिस चेकपोस्ट तोड़ने के मामले में 34 नामजद और 125 अज्ञात पर FIR; JLKM नेता ... Bokaro Sadar Hospital Strike: बोकारो सदर अस्पताल में सफाई कर्मियों की हड़ताल; गंदगी के अंबार से मरीजो... Communal Harmony in Dhanbad: कोयरीबांध की गंगा-जमुनी तहजीब; जहां मुहर्रम के अखाड़े में हिंदू-मुस्लिम... Suspicious Death in Dumka: झारखंड-बंगाल सीमा पर मिला महिला का शव; हत्या की आशंका, पुलिस जांच में जुट... RIMS Director Resignation: रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे पर घमासान; सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने... Akal Takht Summon: बेअदबी कानून संशोधन पर अकाल तख्त सख्त; पंजाब के 40 सिख विधायकों को किया तलब Hoshiarpur Crime News: उद्योगपति के घर बड़ी चोरी; लॉकर तोड़कर 2 करोड़ के सोने-हीरे के जेवर उड़ा ले गए चो...

West Bengal Political Crisis: TMC से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी बने विपक्ष के नेता, ममता सरकार के सामने बढ़ा संकट

पहले सीपीएम और फिर टीएमसी का दामन थामने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने छात्र नेता के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। कोलकाता के साउथ प्वाइंट हाई स्कूल, आशुतोष कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र ऋतब्रत साल 2000 में उस समय सुर्खियों में आए, जब उनकी उम्र करीब 21 वर्ष थी। उन्हें CPI(M) के छात्र संगठन SFI का अखिल भारतीय महासचिव बनाया गया, जहां उन्होंने आठ साल तक संगठन का नेतृत्व किया। सीताराम येचुरी के करीबी होने की वजह से सीपीएम में ऋतब्रत का उदय काफी तेजी से हुआ।

🏛️ राज्यसभा सांसद से TMC का दामन थामने तक की कहानी

सीपीएम में युवा चेहरों को आगे न बढ़ाने की परंपरा के बावजूद, ऋतब्रत का कद लगातार बढ़ता गया। परिणाम यह रहा कि 2014 में मात्र 34 साल की उम्र में वे राज्यसभा सांसद बन गए। हालांकि, 2017 में पार्टी विरोधी गतिविधियों और उनकी जीवनशैली को लेकर सीपीएम ने उन्हें पहले सस्पेंड किया और बाद में निष्कासित कर दिया। इसके बाद 2018 में उन्होंने टीएमसी का दामन थाम लिया और पार्टी की ट्रेड यूनियन शाखा के प्रमुख बने। 2024 में टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा और 2026 के विधानसभा चुनाव में उलुबेरिया पुरबा सीट से शानदार जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति का बड़ा चेहरा बना दिया।

📉 ममता बनर्जी के लिए संकट: क्या दिल्ली से रची गई पार्टी तोड़ने की साजिश?

तृणमूल कांग्रेस ने 1 जून को ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निष्कासित कर दिया, जिसका बड़ा कारण विधानसभा अध्यक्ष को दी गई जानकारी थी कि उन्होंने पार्टी के उस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, जिसमें चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित किया गया था। ममता बनर्जी ने इन घटनाओं को दिल्ली से रची गई साजिश करार दिया है। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि वे ममता बनर्जी के साथ हैं, लेकिन उन्हें अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से समस्या है। 58 विधायकों के साथ विपक्ष का नेता बनने के बाद ऋतब्रत अब टीएमसी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।

संपादकीय टिप्पणी: राजनीति में वफादारियों का बदलना कोई नई बात नहीं है, लेकिन एक ही नेता का दो अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियों (सीपीएम और टीएमसी) में मुख्य भूमिका निभाना यह दर्शाता है कि विचारधारा से ऊपर अब सत्ता और रणनीतिक महत्व हो गया है। क्या आपको लगता है कि ऋतब्रत बनर्जी का यह कदम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के अंत की शुरुआत है? अपने विचार नीचे साझा करें।