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आंध्रप्रदेश से बाहर निकलने की कवायद में है जनसेना पार्टी

तेलंगना का चुनाव अकेले ही लड़ेंगेः पवन कल्याण

  • पार्टी के एक कार्यक्रम में यह राय दी

  • परमिशन के सवाल पर विवाद उभरा है

  • वहां हम अपने बलबूते पर चुनाव लड़ेंगे

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा धमाका किया है। हैदराबाद में आयोजित एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन कल्याण ने घोषणा की कि उनकी पार्टी 2028 में होने वाले तेलंगाना विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगी। पवन कल्याण का यह फैसला तेलंगाना सरकार द्वारा उनकी पार्टी को जनसेना साधक बैठक आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार करने के बाद आया है। उन्होंने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, यह भारत है, कोई किसी को अपने अधिकारों का प्रयोग करने से नहीं रोक सकता। तेलंगाना भारत का एक अभिन्न अंग है। मेरे नेताओं ने पार्टी को मजबूत करने की इच्छा जताई है, इसलिए हम तेलंगाना में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि बीजेपी और टीडीपी के साथ अपने गठबंधन के बावजूद, जन सेना पार्टी तेलंगाना में अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा, स्वतंत्र चुनाव: पार्टी तेलंगाना में अकेले चुनाव लड़ेगी। उन्होंने उल्लेख किया कि तेलंगाना बीजेपी प्रमुख रामचंदर राव ने भी स्पष्ट किया है कि बीजेपी जीएचएमसी चुनाव अकेले लड़ेगी, और जन सेना उसमें गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी। पवन कल्याण ने वादा किया कि वे जल्द ही तेलंगाना का दौरा करेंगे, जनता के मुद्दों को उठाएंगे और अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे।

यह घोषणा साइबरबाद पुलिस द्वारा जन सेना पार्टी की 2,000 सदस्यों वाली बैठक की अनुमति रद्द करने के बाद हुई। पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर के. नागेश्वर राव के खिलाफ जन सेना समर्थकों द्वारा दर्ज कराए गए मामलों के कारण राज्य में तनाव बढ़ा है। प्रोफेसर राव ने आरोप लगाया था कि पवन कल्याण ने अमित शाह से मिलकर पूर्व आंध्र सीएम जगन मोहन रेड्डी की गिरफ्तारी की मांग की थी।

पुलिस की जांच के अनुसार, आंध्र प्रदेश के नेताओं द्वारा इस मामले पर की गई टिप्पणियों ने तेलंगाना के लोगों, छात्र संगठनों और सक्रिय समूहों की भावनाओं को आहत किया है, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इसी अशांति को देखते हुए प्रशासन ने बैठक की अनुमति नहीं दी थी, जिसके जवाब में पवन कल्याण ने अब चुनावी मैदान में उतरने का कड़ा निर्णय लिया है।