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विधायी शक्तियों और संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर सहमति

प्रतिनिधिमंडल के साथ गृह मंत्रालय की बैठक संपन्न

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे के भीतर ही लद्दाख को अधिक विधायी, वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान करने के लिए एक नए तंत्र का प्रस्ताव दिया है। शुक्रवार को गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ उप-समिति (सब-कमेटी) की बैठक में शामिल हुए लद्दाख के नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) के सदस्यों ने यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने बताया कि यह वार्ता बेहद सकारात्मक रही। गृह मंत्रालय जल्द ही प्रस्तावित बदलावों का एक मसौदा भेजेगा, जिसके बारे में उन्हें बताया गया है कि यह विधायी शक्तियों वाले केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे के तहत होगा। शुक्रवार को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस के प्रतिनिधियों वाले एक संयुक्त नागरिक समाज प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों और लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल थे, जिन्हें बीते 14 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत से रिहा किया गया था।

लेह एपेक्स बॉडी के सह-संयोजक चेरिंग दोरजे लाकरुक ने बताया कि गृह मंत्रालय लद्दाख के लिए एक विधायिका का प्रस्ताव तो दे रहा है, लेकिन वह अभी इसे पूर्ण राज्य का दर्जा नाम नहीं देना चाहता। केंद्र सरकार का तर्क है कि इस कदम से लद्दाख पर खुद राजस्व उत्पन्न करने का भारी आर्थिक बोझ आ जाएगा, जिससे केंद्र सरकार सीधे तौर पर फंड आवंटित करने में सक्षम नहीं हो पाएगी।

लाकरुक ने कहा, हमें बताया गया है कि जब लद्दाख आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत हो जाएगा, तब पूर्ण राज्य के दर्जे पर विचार किया जा सकता है। मुख्य सचिव के कार्य और अन्य प्रशासनिक कार्य अब एक निर्वाचित निकाय द्वारा तय किए जाएंगे। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि निर्वाचित सदस्यों को विधानसभा सदस्य कहा जाएगा या कुछ और। हम गृह मंत्रालय के आधिकारिक प्रस्ताव का इंतजार कर रहे हैं, और हमें भी अपनी ओर से एक प्रस्ताव भेजना है।

इस वार्ता में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब एलएबी और केडीए ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे लद्दाख को संविधान के अनुच्छेद 371 (ए, एफ, और जी) की तर्ज पर संवैधानिक सुरक्षा उपाय प्रदान करने पर केंद्र सरकार के साथ एक सैद्धांतिक सहमति पर पहुंच गए हैं (जैसा कि नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम में लागू है)। संविधान का अनुच्छेद 371 अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष प्रावधानों से संबंधित है, जो वर्तमान में देश के 12 राज्यों में प्रभावी है। जब दोरजे लाकरुक से पूछा गया कि इस बार नया क्या है, क्योंकि केंद्र ने पहले भी ऐसे सुरक्षा उपायों का प्रस्ताव दिया था, तो उन्होंने स्पष्ट किया, पहले उन्होंने लद्दाख के लिए विधायी शक्तियों या निर्वाचित प्रतिनिधियों का प्रस्ताव नहीं दिया था, जो इस बार शामिल है।