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नीट यूजी 2026 पेपर लीक में परस्पर विरोधी बयान

मंत्री ने स्वीकारी गड़बड़ी, एनटीए ने कहा लीक नहीं

  • मामले की लीपा पोती करने की तैयारी है

  • प्रश्न पत्र बाहर आने की जिम्मेदारी किसकी

  • सीबीआई जांच में अंदर का खुलासा नहीं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) शायद चाहती होगी कि नीट के ताजा विवाद से एक खास बयान ही आधिकारिक निष्कर्ष बनकर सामने आए। 21 मई को एक संसदीय समिति के समक्ष पेश होते हुए एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि नीट-यूजी 2026 का पेपर सिस्टम के माध्यम से लीक नहीं हुआ था। कागजी तौर पर तो यह एक मजबूत बचाव जैसा लगता है, लेकिन समस्या यह है कि खुद सरकार का इस घटनाक्रम पर बयान इससे बिल्कुल अलग है।

अभी कुछ ही दिन पहले, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि नीट पेपर लीक मामले में कमांड की श्रृंखला में गड़बड़ी हुई थी और उन्होंने कहा कि सरकार इसकी जिम्मेदारी ले रही है। अब तर्क सीधा है— अगर कमांड की श्रृंखला में गड़बड़ी हुई थी, तो एनटीए प्रमुख वास्तव में क्या कहना चाहते हैं जब वे इस बात पर अड़े हैं कि पेपर सिस्टम के माध्यम से लीक नहीं हुआ था?

छात्रों और अभिभावकों के लिए यह अंतर स्पष्टता कम और शब्दों की हेरफेर ज्यादा लगता है। यही वजह है कि नीट को लेकर मौजूदा बयानबाजी इतनी भ्रमित करने वाली है। एक तरफ, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आक्रोश, सीबीआई जांच और विभिन्न राज्यों में गिरफ्तारियों को जन्म देने वाली एक गंभीर गड़बड़ी को स्वीकार किया है। दूसरी तरफ, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी यह साबित करने में जुटी है कि लीक उसके आंतरिक डिजिटल बुनियादी ढांचे से शुरू नहीं हुआ था।

यह प्रशासनिक रूप से तो मददगार हो सकता है, लेकिन जनता का भरोसा बहाल करने में इससे कोई मदद नहीं मिलती क्योंकि छात्र तकनीकी बारीकियों पर बहस नहीं कर रहे हैं। दो साल तक नीट की तैयारी करने वाले एक किशोर को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लीक प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्ट या वितरण के दौरान हुआ था। कोचिंग क्लास के लिए अपनी जमा-पूंजी खाली करने वाले माता-पिता यह सोचकर तसल्ली नहीं पाएंगे कि चलो, कम से कम सर्वर से तो गड़बड़ी नहीं हुई।

छात्रों के लिए भ्रम बिल्कुल सीधा है। यदि सरकार पहले ही मान चुकी है कि गड़बड़ी हुई थी, तो एनटीए अब भी इसे लीक मानने से इनकार क्यों कर रहा है? पेपर बाहर कैसे आया? और कोई भी इसकी जिम्मेदारी क्यों नहीं लेना चाहता? जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक जो नुकसान होना था, वह हो चुका है।