Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में बाघ का जानलेवा हमला, युवक ने लाठी से वार कर बचाई जान शिक्षक हरदास कुशवाहा के तबादले के विरोध में सड़क पर उतरे छात्र, मजना-खरगापुर मार्ग पर लगाया चक्काजाम MPPSC परीक्षा में दो ऑप्शन चुनने पर क्या होगा? हाईकोर्ट पहुंचा ओएमआर शीट और माइनस मार्किंग का विवाद बीना स्टेशन पर तीसरी लाइन निर्माण कार्य के चलते 20 सितंबर से 16 अक्टूबर तक ट्रेनों का संचालन प्रभावि... दतिया के सहिड़ाखुर्द में रिश्तों को तार-तार करने वाली वारदात: 13 वर्षीय किशोरी से खेत में दुष्कर्म मुरैना में शादी के 42 दिन बाद नवविवाहिता शिक्षिका ने लगाई फांसी: अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम,... एमपी में 1.5 लाख शिक्षकों को देनी होगी पात्रता परीक्षा: 21 अगस्त से आवेदन शुरू, 12 अक्टूबर से एग्जाम... जबलपुर के रेस्टोरेंट में काम को लेकर विवाद, सहकर्मी ने 20 वर्षीय युवती की चाकू से गोदकर की हत्या आईडीएफ का कोई भी सैनिक हताहत नहीं नितिन नबीन ने घोषित की नई टीम: 13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव और 12 महिलाओं को मिली जगह; जानें BJP संविधान ...

उमर खालिद को दिल्ली में तीन दिनों की जमानत

मां के ऑपरेशन के लिए उच्च न्यायालय ने छूट दी

  • 2 जून को उनकी मां का ऑपरेशन

  • अंतरिम जमानत में शर्तें भी लागू

  • निचली अदालत ने किया था इंकार

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उमर खालिद को तीन दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है। यह राहत उन्हें साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र के यूएपीए मामले में दी गई है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने आदेश दिया कि खालिद को कड़ी शर्तों के साथ 1 जून से 3 जून तक के लिए रिहा किया जाए। उमर खालिद ने अपने दिवंगत चाचा के निधन के बाद चहलुम की रस्म में शामिल होने और अपनी मां की चिकित्सा सर्जरी (जो 2 जून को निर्धारित है) की देखरेख के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी थी। उन्होंने ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) के 19 मई के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया गया था।

सुनवाई के दौरान खालिद के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पाइस ने दलील दी कि अतीत में भी उनकी बहन की शादी के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी और उन्होंने कभी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने विरोध करते हुए कहा कि सर्जरी मामूली है और परिवार के अन्य सदस्य देखभाल कर सकते हैं।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए 3 दिनों की जमानत मंजूर की ताकि खालिद अपनी मां के साथ समय बिता सकें। अदालत ने शर्त रखी है कि इस दौरान खालिद के पास केवल एक मोबाइल फोन रहेगा और वे जांच अधिकारी  के निरंतर संपर्क में रहेंगे।

वैसे उमर खालिद की जमानत का मामला इनदिनों न्यायिक चर्चा के बीच आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने पूर्व आदेश की आलोचना करते हुए कहा है कि भारतीय संविधान और न्याय के तहत जमानत ही एक प्रक्रिया है, जो हर भारतीय को मिलना  चाहिए। इसी क्रम में बिना जांच के अनंत काल तक किसी को जेल में रखने को भी सजा ही माना गया है। लिहाजा ऐसे मौके पर उमर खालिद को मिली अंतरिम जमानत के बाद शीर्ष अदालत में फिर से यह मामला विचार के लिए पेश होगा।