ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने अचानक ही किया ऐसा एलान
एजेंसियां
लंदन: अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी स्थित ब्रिटिश दूतावास से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय (फॉरेन ऑफिस) ने बुधवार सुबह आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वॉशिंगटन में देश के दूसरे सबसे वरिष्ठ राजनयिक और उप-मिशन प्रमुख (डिप्टी हेड ऑफ मिशन) जेम्स रोस्को ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और वे सेवा से मुक्त हो चुके हैं।
विदेश मंत्रालय ने इस अचानक हुए घटनाक्रम की पुष्टि तो की है, लेकिन रोस्को द्वारा पद छोड़े जाने के पीछे के सटीक कारणों का खुलासा नहीं किया है। ब्रिटिश सरकार की इस चुप्पी ने राजनयिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। इस संबंध में जब जेम्स रोस्को से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनकी तरफ से भी तत्काल कोई टिप्पणी या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जेम्स रोस्को को जुलाई 2022 में इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील पद पर नियुक्त किया गया था। वॉशिंगटन में ब्रिटिश दूतावास पिछले कुछ समय से लगातार उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम ब्रिटिश दूतावास में चल रहे एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक संकट की अगली कड़ी माना जा रहा है।
इससे पहले, अमेरिका में ब्रिटेन के राजदूत पीटर मैंडेलसन को उनके पद से बर्खास्त कर दिया गया था। मैंडेलसन पर अमेरिका के दिवंगत और सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ नजदीकी संबंध होने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया था। इस बड़ी कार्रवाई के बाद, सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच जेम्स रोस्को ने ही अमेरिका में ब्रिटेन के कार्यवाहक राजदूत (शार्जे डीअफेयर्स) के रूप में कमान संभाली थी और दूतावास के कामकाज को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया था।
इस प्रशासनिक शून्यता को भरने के लिए ब्रिटिश सरकार ने पिछले साल दिसंबर में क्रिस्टियन टर्नर को अमेरिका में ब्रिटेन का नया पूर्णकालिक राजदूत नियुक्त किया था। टर्नर ने इसी साल फरवरी में आधिकारिक तौर पर अपना कार्यभार संभाला था।
नए राजदूत के कार्यभार संभालने के महज कुछ ही महीनों के भीतर उप-राजदूत जेम्स रोस्को का इस तरह अचानक पद छोड़ना कई सवाल खड़े करता है। विश्लेषकों का मानना है कि एपस्टीन विवाद के बाद से ब्रिटिश विदेश मंत्रालय दूतावास की छवि सुधारने की कोशिशों में जुटा है, और रोस्को का जाना इसी आंतरिक फेरबदल या किसी नए नीतिगत बदलाव का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल, लंदन और वॉशिंगटन दोनों ही जगहों पर इस इस्तीफे के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।