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पुतिन के भारत दौरे के एलान से अमेरिकी कूटनीति तेज

नाटो की बैठक के बाद रुबिया भारत आयेंगे

एजेंसियां

वाशिंगटन: अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को घोषणा की है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस सप्ताह स्वीडन और भारत के बेहद महत्वपूर्ण आधिकारिक दौरे पर रवाना हो रहे हैं। रुबियो पहले स्वीडन में नाटो देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे, जहां वे गठबंधन सहयोगियों के बीच सैन्य खर्च और जिम्मेदारियों के अधिक साझाकरण (ग्रेटर बर्डन शेयरिंग) पर चर्चा करेंगे। इसके तुरंत बाद, वे रणनीतिक वार्ताओं के लिए भारत का रुख करेंगे।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस कार्यकाल में नाटो और भारत दोनों के साथ ही अमेरिका के संबंध कुछ तनावपूर्ण दौर से गुजरे हैं। ट्रंप लगातार नाटो गठबंधन से बाहर निकलने की चेतावनी देते रहे हैं और भारत पर भी उच्च आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं, जिसके चलते रुबियो के इस दौरे को डैमेज कंट्रोल और नए समझौतों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट द्वारा जारी बयान के अनुसार, विदेश मंत्री मार्को रुबियो 22 मई को स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग पहुंचेंगे। वहां वे नाटो सहयोगियों के साथ रक्षा निवेश बढ़ाने और गठबंधन में वित्तीय व सैन्य जिम्मेदारियों को बराबर बांटने की आवश्यकता पर कड़े रुख के साथ चर्चा करेंगे। इसके साथ ही, रुबियो वहां आर्कटिक सेवन देशों—कनाडा, डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड—के अपने समकक्षों से भी मुलाकात करेंगे, जहां साझा आर्थिक और सुरक्षा हितों पर बातचीत केंद्रित होगी।

स्वीडन के बाद, मार्को रुबियो 23 से 26 मई तक भारत के चार दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली का दौरा करेंगे। भारतीय नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत मुख्य रूप से ऊर्जा सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित होगी। ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मधुर संबंधों के बावजूद, पिछले साल अमेरिका द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाए जाने से रिश्तों में कुछ कड़वाहट आई थी, हालांकि बाद में इनमें से कई शुल्कों को वापस ले लिया गया था। वर्तमान में दोनों देश एक नए व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में टैरिफ बढ़ोतरी से बचा जा सके।

इस बीच, जापान की जीजी प्रेस ने रिपोर्ट दी है कि जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी भी 26 मई को क्वाड समूह की बैठक के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं, जहां चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब में क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट के आधिकारिक बयान में फिलहाल इस क्वाड बैठक का कोई सीधा जिक्र नहीं किया गया है।