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ब्रिटिश राजनयिक को जासूसी के आरोप में निकाला

रूस और ब्रिटेन के बीच जारी कूटनीतिक तनाव गहराया

मॉस्कोः सोमवार को रूस ने एक ब्रिटिश राजनयिक पर जासूसी के आरोप लगाते हुए उन्हें देश से निष्कासित कर दिया। हालांकि, लंदन ने इन आरोपों को पूरी तरह से बकवास बताते हुए खारिज कर दिया है। रूस की संघीय सुरक्षा सेवा ने बयान जारी कर कहा कि उक्त ब्रिटिश राजनयिक ऐसी विनाशकारी खुफिया गतिविधियों में लिप्त थे, जो रूस की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।

एफएसबी के आदेशानुसार, राजनयिक को दो सप्ताह के भीतर रूस छोड़ने का निर्देश दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद रूसी विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के चार्ज डी अफेयर्स को तलब किया और चेतावनी दी कि लंदन इस मामले में कोई जवाबी कार्रवाई न करे।

रूस और ब्रिटेन के बीच संबंधों में पिछले एक दशक से भारी गिरावट देखी गई है। दोनों देशों ने समय-समय पर एक-दूसरे के दूतावास कर्मियों को निष्कासित किया है। यह सिलसिला अक्सर जैसे को तैसा की तर्ज पर चलता है। 2018 के सालिस्बरी जहर कांड के बाद से दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर एक-दूसरे के राजनयिकों को निकाला था। इसी वर्ष जनवरी में भी रूस ने एक ब्रिटिश राजनयिक को निकाला था, जिसके जवाब में पिछले महीने ब्रिटेन ने एक रूसी राजनयिक की मान्यता रद्द कर दी थी।

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने रूस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उत्पीड़न का एक आक्रामक और समन्वित अभियान करार दिया है। ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि रूस जानबूझकर उनके राजनयिकों के काम के बारे में दुर्भावनापूर्ण और आधारहीन आरोप फैला रहा है।

ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि वह अपने दूतावास के कर्मचारियों और उनके परिवारों के प्रति इस तरह की डराने-धमकाने वाली कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद से पश्चिमी देशों और रूस के बीच कूटनीतिक संवाद के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं, और यह निष्कासन उसी भू-राजनीतिक दरार का एक और हिस्सा है।