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देश की ऊर्जा सुरक्षा का हल तलाशने पांच देशों की विदेश यात्रा

यूएई के साथ कई मुद्दों पर समझौता संपन्न

  • भारत में निवेश करने का भरोसा दिया

  • तेल और गैस के अलावा रक्षा सहयोग

  • गुजरात में जहाज मरम्मत कारखाना

एजेंसियां

अबू धाबी: भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध एक नए मुकाम पर पहुँच गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खाड़ी देश की महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान शुक्रवार को दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) निवेश से जुड़े कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस द्विपक्षीय वार्ता की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि यूएई सरकार ने भारतीय बुनियादी ढांचे और प्रमुख वित्तीय संस्थानों में 5 बिलियन डॉलर (लगभग 41,000 करोड़ रुपये) के विशाल निवेश की आधिकारिक घोषणा की है।

इन ऐतिहासिक समझौतों का आदान-प्रदान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की उपस्थिति में किया गया। प्रधानमंत्री मोदी की यह संक्षिप्त यूएई यात्रा उनके पांच देशों के व्यापक अंतरराष्ट्रीय दौरे का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है।

इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे पर सहमति बनी, जो भारत और यूएई के बीच तेजी से बढ़ते सुरक्षा, सैन्य और खुफिया सहयोग को रेखांकित करती है। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी दोनों देशों ने बड़े कदम उठाए हैं। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके साथ ही, भारत को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस की निर्बाध और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष समझौता हुआ है, जिससे भविष्य में भारत की ऊर्जा जरूरतें सुरक्षित होंगी।

समुद्री और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया गया, जिसके तहत गुजरात के वाडिनार में एक अत्याधुनिक जहाज मरम्मत केंद्र स्थापित किया जाएगा। वहीं, यूएई द्वारा घोषित 5 बिलियन डॉलर के निवेश का एक बड़ा हिस्सा भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ-साथ बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ियों, जैसे आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल में लगाया जाएगा।

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और क्षेत्रीय तनावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इन विवादों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता बताया और इस कठिन परिस्थिति में उल्लेखनीय धैर्य दिखाने के लिए यूएई के राष्ट्रपति की सराहना की। यूएई पर हुए हालिया हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि संकट के इस दौर में भारत यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। अंत में, प्रधानमंत्री ने यूएई में रह रहे लाखों प्रवासी भारतीयों की एक परिवार की तरह देखभाल करने के लिए वहाँ के नेतृत्व का दिल से आभार व्यक्त किया।