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हथियारों पर सरकारी नियंत्रण का लिया संकल्प

इराक की संसद ने नई सरकार को दी अपनी मंजूरी

एजेंसियां

बगदाद: महीनों के राजनीतिक गतिरोध और कशमकश के बाद इराक को आखिरकार नई सरकार मिल गई है। गुरुवार को इराकी सांसदों ने अली अल-जैदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट को आधिकारिक मंजूरी दे दी। मात्र 40 वर्ष की आयु में जैदी इराक के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश आंतरिक सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति के बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। जैदी को कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क का समर्थन प्राप्त है, जो कि ईरान के साथ घनिष्ठ संबंध रखने वाले शक्तिशाली शिया समूहों का एक गठबंधन है।

पदभार संभालते ही प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने जो सबसे महत्वपूर्ण घोषणा की, वह थी—हथियारों पर राज्य का पूर्ण एकाधिकार सुनिश्चित करना। उनका लक्ष्य देश के सुरक्षा तंत्र में आमूल-चूल सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि हथियारों का नियंत्रण केवल आधिकारिक सरकारी बलों के पास रहे। यह संकल्प सीधे तौर पर उन तेहरान समर्थित सशस्त्र समूहों की ओर इशारा करता है, जिन्हें भंग करने के लिए अमेरिका लंबे समय से बगदाद पर दबाव बना रहा है। इराक के लिए यह किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि उसे अपने दो कट्टर प्रतिद्वंद्वी सहयोगियों—अमेरिका और ईरान—के बीच एक बारीक संतुलन बनाए रखना है।

संसद ने जैदी के सरकारी कार्यक्रम को तो हरी झंडी दे दी है, लेकिन सत्ता की राह अभी भी पूरी तरह निष्कंटक नहीं है। कैबिनेट के कुल 23 पदों में से फिलहाल केवल 14 मंत्रियों के नाम को ही मंजूरी मिल पाई है। रक्षा और गृह जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों पर विभिन्न राजनीतिक गुटों के बीच खींचतान जारी है, जिसके कारण नौ पदों पर नामांकन अभी भी अधर में लटका हुआ है। यह राजनीतिक सौदेबाजी जैदी की निर्णय क्षमता के लिए पहली बड़ी आंतरिक चुनौती साबित हो रही है।

कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान और अमेरिका दोनों ने ही मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। जहाँ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देने की बात कही, वहीं अमेरिकी राजनयिक टॉम बैरक ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की उम्मीद जताई।

प्रधानमंत्री के सामने सबसे बड़ा संकट आर्थिक है। इराक का 90 प्रतिशत बजट तेल निर्यात से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक व्यवधानों के कारण इराक की राष्ट्रीय आय को भारी नुकसान पहुँचा है। ऐसे में जैदी को न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालना है, बल्कि उन खाड़ी देशों के साथ भी संबंध सुधारने हैं, जो इराक की धरती से होने वाले सशस्त्र हमलों के कारण नाराज रहे हैं। आने वाले महीने यह तय करेंगे कि जैदी की युवा ऊर्जा इराक को इस बहुआयामी संकट से उबार पाती है या नहीं।