स्थानीय चुनावों में करारी हार के बाद कुर्सी बचाने की जंग
एजेंसियां
लंदनः ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर सोमवार को अपनी स्थिति बचाने के लिए कड़े संघर्ष करते नजर आए। अपनी ही पार्टी के भीतर से बढ़ते दबाव और करीबी सहयोगियों के इस्तीफों की लहर के बावजूद, उन्होंने पद छोड़ने से इनकार कर दिया है। पिछले कुछ दिनों में 70 से अधिक लेबर सांसदों ने सार्वजनिक रूप से उनसे इस्तीफा देने का आग्रह किया है, जिससे पार्टी के भीतर विद्रोह की स्थिति और गहरी हो गई है।
स्टार्मर के नेतृत्व पर यह संकट 8 मई को आए स्थानीय चुनावों के नतीजों के बाद गहराया है। इन चुनावों में लेबर पार्टी को इंग्लैंड भर में सैकड़ों काउंसिल सीटों का नुकसान हुआ है। पार्टी ने वेल्स में अपने पुराने गढ़ खो दिए और स्कॉटलैंड में भी उसे प्रतिद्वंद्वियों के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। यूगोव के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग आधे ब्रिटिश नागरिक अब यह मानते हैं कि स्टार्मर को प्रधानमंत्री का पद छोड़ देना चाहिए।
राजनीतिक हार के साथ-साथ स्टार्मर सरकार बढ़ती आर्थिक समस्याओं से भी घिरी हुई है। देश में उधारी की लागत बढ़ने और जीवनयापन के खर्च में कमी न आने के कारण सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा, स्टार्मर द्वारा पीटर मैंडेलसन को वाशिंगटन में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने के फैसले ने भी काफी विवाद खड़ा कर दिया है। मैंडेलसन के जेफ्री एपस्टीन के साथ संबंधों की खबरों के चलते विपक्ष और पार्टी के भीतर से स्टार्मर की कड़ी आलोचना हो रही है।
स्कॉटलैंड में जॉन स्विनी की निर्णायक जीत ने स्टार्मर के अधिकार को और कमजोर कर दिया है। लेबर पार्टी की हार का सीधा फायदा रिफॉर्म यूके जैसे दलों को मिलता दिख रहा है, जिन्होंने कई क्षेत्रों में अपनी पैठ बनाई है। हालांकि स्टार्मर ने यह कहते हुए पद छोड़ने से मना कर दिया है कि उनके जाने से पार्टी में अराजकता फैल सकती है, लेकिन वेस स्ट्रीटिंग और एंजेला रेनर जैसे संभावित नेतृत्व प्रतिद्वंद्वियों की हलचल ने उनकी राह और मुश्किल कर दी है।