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सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति ने भाई को पद से हटाया

देश को विश्वास में लेने के तहत की नई कार्रवाई

एजेंसियां

दमिश्क, सीरिया: सीरिया की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के बीच, अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने शनिवार को प्रशासन में एक व्यापक फेरबदल की घोषणा की। इस कदम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनके अपने ही भाई, माहेर अल-शारा को राष्ट्रपति पद के महासचिव के प्रभावशाली पद से हटाना रहा। यह निर्णय उन आरोपों के बाद आया है जिनमें सरकार पर परिवारवाद के जरिए पुराने असद शासन की कार्यशैली को दोहराने का आरोप लगाया जा रहा था।

गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में अहमद अल-शारा के नेतृत्व में हुए विद्रोही अभियान ने बशर अल-असद के 14 साल पुराने क्रूर शासन का अंत किया था। असद और उनके पिता हाफ़िज़ अल-असद के दौर में सत्ता की चाबी केवल परिवार के सदस्यों के पास होती थी। उदाहरण के तौर पर, बशर के भाई माहेर असद सेना की चौथी बख्तरबंद डिवीजन के प्रमुख थे, जिनका नाम मानवाधिकारों के हनन और तस्करी जैसे अपराधों से जुड़ा था। ऐसे में अहमद अल-शारा द्वारा अपने भाई माहेर (जो पेशे से डॉक्टर हैं और पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं) की नियुक्ति ने जनता के बीच असंतोष पैदा कर दिया था। इस फेरबदल के जरिए राष्ट्रपति ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि नई सरकार पुरानी आदतों को नहीं दोहराएगी।

सरकारी समाचार एजेंसी साना के अनुसार, माहेर अल-शारा के स्थान पर अब अब्दुल रहमान बदरुद्दीन अल-आमा को नियुक्त किया गया है। अल-आमा इससे पहले होम्स प्रांत के गवर्नर के रूप में अपनी प्रशासनिक कुशलता साबित कर चुके हैं। राष्ट्रपति अल-शारा ने केवल केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रांतीय स्तर पर भी बड़े बदलाव किए हैं। होम्स, लताकिया, दीर अल-ज़ोर और कुनीत्रा जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रांतों के लिए नए गवर्नरों की नियुक्ति की गई है। शिक्षाविद खालिद ज़ारूर को नया सूचना मंत्री नियुक्त किया गया है। वे दमिश्क विश्वविद्यालय में मीडिया संकाय के डीन रह चुके हैं और हमज़ा मुस्तफ़ा का स्थान लेंगे।

सीरिया वर्तमान में एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। 14 वर्षों के विनाशकारी गृहयुद्ध ने राष्ट्र को सामाजिक और आर्थिक रूप से विभाजित कर दिया है। अहमद अल-शारा के लिए सबसे बड़ी चुनौती संस्थानों में जनता का विश्वास बहाल करना और एक समावेशी सरकार बनाना है। यह फेरबदल उस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि सत्ता अब व्यक्तिगत निष्ठा के बजाय योग्यता और राष्ट्रीय हित के आधार पर संचालित होगी।