Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
DSPMU News: खेल चयन और शिक्षकों की कार्यशैली पर भारी हंगामा; छात्र संघ ने कुलपति को सौंपा 7 सूत्री म... Deoghar Heritage News: बाबा मंदिर के बाद अब प्राचीन धरोहरों से भी पहचान बनाएगा देवघर; खुदाई में मिली... Ludhiana News: लुधियाना नगर निगम दफ्तर के बाहर डेयरी संचालकों का हंगामा; सड़क पर पलटा गोबर, पुलिस से... Punjab News: बेअदबी कानून पर अकाल तख्त साहिब में पेश हुए स्पीकर कुलतार सिंह संधवां; जत्थेदार के सुझा... Political Breaking: आम आदमी पार्टी के पूर्व MLA पर गिरी गाज; विजिलेंस विभाग ने पूछताछ के लिए जारी कि... Traffic Rules Update: अवैध जुगाड़ू वाहनों के खिलाफ RTO की बड़ी मुहिम; सड़कों पर मचा हड़कंप, वसूला भार... Ludhiana Crime News: लुधियाना में दिनदहाड़े हथियार की नोक पर महिला से लूट; इलाके में फैली दहशत, पुलि... Border Security News: भारत-पाक सीमा पर नेपाली नागरिक गिरफ्तार; पाकिस्तान से घुसपैठ की कोशिश को BSF न... Sandeep Pathak & Rajinder Gupta: सांसद संदीप पाठक और राजिंद्र गुप्ता को बड़ी राहत; हाईकोर्ट ने पंजाब... Faridkot Youth Death in Canada: कनाडा में फरीदकोट के युवक की दर्दनाक मौत; परिवार पर टूटा दुखों का पह...

Haryana Govt Decision: बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा के लिए हरियाणा सरकार की बड़ी पहल; जारी किए गए ये नए दिशा-निर्देश

चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी उपायुक्तों, SDM और जिला प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की है कि वे ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ के प्रावधानों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील रहें और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों को पूरी प्रतिबद्धता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ हल करें।

मुख्य सचिव आज यहाँ ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007’ और ‘हरियाणा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण नियम, 2009’ पर आयोजित राज्य-स्तरीय कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण और अंत्योदय (सेवाएं) विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में राज्य भर से उपायुक्तों, उप-मंडल अधिकारियों (SDM), कानूनी विशेषज्ञों और वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से जुड़े कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री रस्तोगी ने कहा कि पुरानी पीढ़ी ने एक ऐसा दौर देखा है जब कई पीढ़ियां संयुक्त परिवार प्रणाली में एक साथ रहती थीं और बुजुर्गों की देखभाल करना परिवार की एक स्वाभाविक जिम्मेदारी मानी जाती थी। उस समय, माता-पिता की उपेक्षा को सामाजिक रूप से गलत माना जाता था और परिवार के अन्य सदस्य बुजुर्गों को भावनात्मक और सामाजिक संबल प्रदान करते थे। लेकिन बदलते सामाजिक ताने-बाने और संयुक्त परिवारों के बजाय एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण, अब कई बुजुर्ग माता-पिता या तो केवल एक संतान पर निर्भर हैं या अकेले रह रहे हैं। ऐसी स्थिति में, उनके कल्याण के लिए संस्थागत सुरक्षा और निरंतर निगरानी की आवश्यकता बढ़ गई है।

श्री रस्तोगी ने कहा कि ये कानून न केवल बुजुर्ग माता-पिता को वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने का एक कानूनी माध्यम हैं, बल्कि ये वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान, गरिमा, स्वास्थ्य सेवाएं, आश्रय और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करने की एक सामाजिक और नैतिक प्रतिबद्धता भी हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं अधिकारियों की समझ को मजबूत करने और मामलों का समय पर निपटारा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को वृद्धाश्रमों, वरिष्ठ नागरिक क्लबों, आपातकालीन आश्रय सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और जिला स्तर पर वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी सरकारी और गैर-सरकारी वृद्धाश्रमों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए भी कहा। इस मौके पर, सेवा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव, श्रीमती जी. अनुपमा ने कहा कि कानून-व्यवस्था और रोज़मर्रा के प्रशासनिक कामों के अलावा, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना भी प्रशासनिक अधिकारियों की ज़िम्मेदारियों का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय ही मानवीय शासन की नींव है, और अधिकारियों को इस ज़िम्मेदारी को पूरी संवेदनशीलता और लगन के साथ निभाना चाहिए।

इस वर्कशॉप के दौरान, ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ और ‘हरियाणा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण नियम, 2009’ के अलग-अलग प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन नियमों के तहत, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से ट्रिब्यूनल प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। कल्याणकारी संस्थाओं से जुड़े सुलह अधिकारी परिवारों के बीच पैदा होने वाले विवादों को बेहतर तरीके से सुलझाने में मदद करते हैं, और विवाद के सफलतापूर्वक निपटारे पर उन्हें मानदेय भी दिया जाता है।

इस समीक्षा बैठक में वर्ष 2025 की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट भी पेश की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान, 177 वरिष्ठ नागरिकों के लिए भरण-पोषण भत्ता (Maintenance Allowance) मंज़ूर किया गया। इस वर्कशॉप में भरण-पोषण ट्रिब्यूनल प्रणाली के कामकाज के बारे में भी जानकारी दी गई।

अधिकारियों ने बताया कि जो वरिष्ठ नागरिक अपना भरण-पोषण खुद करने में असमर्थ हैं, वे बहुत कम शुल्क देकर ट्रिब्यूनल में आवेदन कर सकते हैं। ट्रिब्यूनल के पास यह अधिकार है कि वह प्रति माह 10,000 रुपये तक का भरण-पोषण भत्ता तय कर सके, और सुनवाई की प्रक्रिया के दौरान अंतरिम भत्ता भी प्रदान कर सके। यदि कोई पक्ष ट्रिब्यूनल के आदेश का उल्लंघन करता है, तो दोषी पक्ष के खिलाफ वसूली की कार्रवाई और जेल भेजने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

उन बेसहारा वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिनकी मासिक आय 1500 रुपये से कम है। ज़िला अधिकारियों को यह जानकारी दी गई कि वे ऐसे मामलों का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) ले सकते हैं, और किसी औपचारिक शिकायत का इंतज़ार किए बिना ही ऐसे मामलों को ट्रिब्यूनल के पास भेज सकते हैं। इस वर्कशॉप में सेवा विभाग के निदेशक श्री प्रशांत पंवार और संयुक्त निदेशक श्री अर्पित गहलावत के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।