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Deoghar Heritage News: बाबा मंदिर के बाद अब प्राचीन धरोहरों से भी पहचान बनाएगा देवघर; खुदाई में मिली 17वीं शताब्दी की संरचना

देवघर: पूरे देश में देवघर की पहचान धार्मिक नगरी के रूप में होती है. यहां स्थित बैद्यनाथ मंदिर में देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. अब देवघर केवल बाबा मंदिर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां की पौराणिक और प्राचीन धरोहरें भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनने जा रहे हैं.

दरअसल, देवघर के जलसार पार्क के पास 17वीं शताब्दी की मलूटी परंपरा से मिलती-जुलती प्राचीन संरचनाएं मिली हैं. वहीं देवघर के डीसी आवास के पीछे भी 17वीं शताब्दी का एक मकबरा मौजूद है. जिसे अब जिला प्रशासन द्वारा संरक्षित किए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है.

इस संबंध में जिला खेल एवं सांस्कृतिक पदाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि राज्य के कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से पत्र जारी कर सभी जिलों को अपने-अपने क्षेत्रों की प्राचीन धरोहरों को चिन्हित कर संरक्षण का कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया है. उन्होंने कहा कि देवघर में मौजूद इन ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के बाद शहर एक बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकेगा. हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा मंदिर पहुंचते हैं और यदि इन प्राचीन धरोहरों का संरक्षण एवं विकास किया जाता है तो पर्यटक धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से जान सकेंगे.

जिला पर्यटन पदाधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि राज्य से निर्देश मिलने के बाद उन्होंने स्वयं इन प्राचीन आकृतियों और संरचनाओं का निरीक्षण किया है. आने वाले समय में पर्यटकों की सुविधा और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से इन स्थलों का विकास किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां राज्य की संस्कृति और परंपरा को समझ सके.