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Gas Cylinder Crisis: एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से अभी नहीं मिलेगी राहत; आपूर्ति में देरी से उपभोक्ता परेशान

जालंधर: देशभर में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत से जूझ रहे उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। अमरीका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह सामान्य रूप से न खुल पाने के कारण एल.पी.जी. गैस की अंतर्राष्ट्रीय सप्लाई चेन अभी भी बुरी तरह प्रभावित बनी हुई है। भारत की लगभग 60 प्रतिशत एल.पी.जी. जरूरत आयात से पूरी होती है, जबकि इसमें से करीब 90 प्रतिशत गैस खाड़ी देशों से इसी समुद्री मार्ग के जरिए आती है, जिस कारण संकट लगातार गहराता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार तथा तेल कंपनियां लगातार हालात सामान्य करने के प्रयास कर रही हैं, लेकिन गैस के जहाजों की सीमित आवाजाही, समुद्री सुरक्षा संकट और आयात में भारी देरी के चलते घरेलू उपभोक्ताओं तक पर्याप्त गैस सिलेंडर नहीं पहुंच पा रहे। हाल ही में कुछ एल.पी.जी. टैंकर भारत के लिए रवाना जरूर हुए हैं, परंतु विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर आने में अभी कम से कम 2 से 3 महीने का समय लग सकता है।

बुकिंग के बावजूद एक-एक महीना सिलेंडर नहीं मिलते 

गैस सिलेंडरों की कमी का सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। शहरी इलाकों में जहां बुकिंग के बाद कई-कई दिन तक सिलेंडर नहीं पहुंच रहा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 20 से 30 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर एजैंसियां उपभोक्ताओं को स्पष्ट जवाब देने में भी असमर्थ दिखाई दे रही हैं, जिससे लोगों में भारी रोष व्याप्त है।

गृहिणियों का कहना है कि रसोई का पूरा बजट बिगड़ चुका है। जिन घरों में एक ही सिलैंडर है, वहां सिलैंडर खत्म होने के बाद भोजन बनाना तक मुश्किल हो रहा है। मजबूरी में लोग लकड़ी, कोयला अथवा छोटे स्टोव का सहारा लेने लगे हैं। निम्न आय वर्ग के परिवारों की स्थिति सबसे अधिक दयनीय बताई जा रही है।

गैस एजेंसियों की चैकिंग करवाने की मांग उठी

कई गैस एजेंसियों पर रोजाना उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ रही है। लोग सुबह से एजेंसी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें यही जवाब मिल रहा है कि गोदामों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसियां समय पर सही जानकारी नहीं दे रहीं और डिलीवरी में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। कई लोगों ने यह भी शिकायत की कि बुकिंग के बाद डिलीवरी की तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसियों को प्रशासनिक निगरानी में लेकर नियमित स्टॉक की जांच की जानी चाहिए ताकि जमाखोरी और मनमानी पर रोक लग सके।

प्रशासन से उपभोक्ताओं को कोई उम्मीद नहीं

हालांकि पैट्रोलियम मंत्रालय की ओर से देश में गैस सप्लाई को नियंत्रित रखने के दावे किए जा रहे हैं और घरेलू सिलैंडर वितरण को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। लगातार घटती खपत के पीछे भी यही कारण बताया जा रहा है कि लोगों को समय पर सिलैंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे। उपभोक्ताओं का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा गैस एजेंसियों के गोदामों की नियमित जांच नहीं की जा रही, जिससे कई जगह कृत्रिम कमी की आशंका भी जताई जा रही है। यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है।