Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jyeshtha Mah 2026: ज्येष्ठ माह शुरू; बड़ा मंगल से लेकर शनि जयंती तक, जानें इस महीने के प्रमुख व्रत-त... iPhone Comparison 2026: iPhone 15, 16 या iPhone 17? जानें इस साल कौनसा मॉडल खरीदना है आपके लिए बेस्ट Ek Din Box Office: आमिर खान के बेटे की फिल्म का बुरा हाल; पहले दिन 1 करोड़ के लिए भी तरसी, 'लवयापा' ... Accident News: सेल्फी के चक्कर में उजड़ गए तीन घर! बांध में डूबने से 3 दोस्तों की दर्दनाक मौत, रेस्क... H5N1 Outbreak: कर्नाटक में मोरों पर बर्ड फ्लू का हमला! 44 की मौत से मचा हड़कंप, सरकार ने जारी की एडव... Shocking News: मौज-मस्ती कर रहे बेटे की पिता ने ही कर दी पुलिस से शिकायत; खुला 20 लाख रुपए की चोरी क... DDA New Housing Policy: दिल्ली मेट्रो और नमो भारत स्टेशनों के पास मिलेंगे किफायती फ्लैट्स; जानें क्य... IPL 2026: आखिर मैच डे पर CSK के ड्रेसिंग रूम से क्यों गायब हैं MS Dhoni? कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने किया... India Remittances: मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद प्रवासियों ने भरी भारत की तिजोरी; RBI डेटा में हुआ बड़ा... Jabalpur News: 'मौत भी जुदा न कर सकी प्यार', बरगी बांध हादसे पर बोले धीरेंद्र शास्त्री; पीड़ितों के ...

कोहिनूर तो महज शुरुआत है! ब्रिटेन के म्यूजियम में कैद हैं भारत की ये अनमोल निशानियां

न्यूयार्क के मेयर जोहरान ममदानी ने ब्रिटेन में मौजूद कोहिनूर हीरे को भारत लौटाने की वकालत की है. मूल रूप से भारतवंशी ममदानी ने यह मांग उस समय की जब ब्रिटेन के किंग अमेरिका के दौरे पर हैं. ममदानी ने यहां तक कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे ब्रिटेन के किंग से कहेंगे कि वे भारत का बेशकीमती कोहिनूर हीरा उसे वापस कर दें. यह हीरा इस समय टॉवर ऑफ लंदन के जेवेल हाउस में रखा हुआ है.

ममदानी का यह बयान वायरल हो गया. इसके बाद जानकार यह जानने में जुट गए कि ब्रिटेन के पास अभी भी भारत की कितनी चीजें हैं? आइए, विस्तार से समझते हैं.

हीरे-जवाहरात, मूर्तियां तक ब्रिटेन के पास

कोहिनूर ही नहीं, भारत की कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें आज भी ब्रिटेन में हैं. यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है. कुछ बुद्धिजीवियों और नेताओं ने इन वस्तुओं की वापसी की मांग उठाई है. इससे लोगों में जागरूकता बढ़ी है. ब्रिटेन के संग्रहालयों में भारत से गई कई चीजें रखी हैं. इनमें हीरे-जवाहरात, मूर्तियां, पांडुलिपियां और कलाकृतियां शामिल हैं. ये वस्तुएं भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. इनका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी बहुत बड़ा है.

कैसे ईरान से भारत लौटकर फिर ब्रिटेन पहुंचा कोहिनूर?

कोहिनूर हीरा सबसे ज्यादा चर्चा में रहता है. यह भारत की पहचान माना जाता है. यह कई शासकों के पास रहा. बाद में यह ब्रिटिश ताज का हिस्सा बन गया. भारत लंबे समय से इसकी वापसी की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है. यह हीरा मुगलों के पास था. जब ईरानी शासक ने भारत पर हमला किया तो पगड़ी बदलने के बहाने उसने यह हीरा मुगल बादशाह रंगीला से अपने कब्जे में ले लिया. फिर जब नादिर शाह की मौत हुई तो उसके करीबी अहमद शाह के जरिए वापस पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के पास यह हीरा आ गया.

महाराजा रणजीत सिंह के निधन के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के अफसरों ने उनके राज्य पर लगभग कब्जा सा कर लिया क्योंकि रणजीत सिंह के वारिस दिलीप सिंह की उम्र बेहद कम थी. लाहौर में उनके किले पर ईस्ट इंडिया कंपनी का झण्डा लगा दिया गया और बेशकीमती हीरा कोहिनूर अग्रेजों के कब्जे में पहुंच गया. फिर इसे अंग्रेज अफसरों ने ब्रिटेन रवाना कर दिया. वहां पहुंचने के बाद ब्रिटेन की कई रानियों ने उसे धारण किया. अभी भी वह हीरा ब्रिटेन के पास है.

टीपू सुल्तान की तलवार, अंगूठी भी

टीपू सुल्तान की तलवार, अंगूठी और उनका प्रसिद्ध टाइगर मॉडल भी ब्रिटेन में है. यह मॉडल एक बाघ को अंग्रेज सैनिक पर हमला करते दिखाता है. यह उनकी सोच और संघर्ष का प्रतीक है. इन वस्तुओं का ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है.

अमरावती स्तूप की मूर्तियां और सुलतानगंज बुद्धा

बिहार से मिली भगवान बुद्ध की विशाल कांस्य प्रतिमा भी ब्रिटेन के बरमिंघम म्यूजियम एवं आर्ट गैलरी में रखी है. इसे भी अंग्रेजी अपने साथ उसी समय ले गए थे, जब उनका भारत पर राज था.आंध्र प्रदेश के अमरावती स्तूप से जुड़ी कई मूर्तियां ब्रिटेन में रखी हैं. ये प्राचीन बौद्ध कला के उत्कृष्ट उदाहरण हैं. इन्हें औपनिवेशिक काल में भारत से ले जाया गया था. अब भारत इनकी वापसी की मांग कर लगातार करता आ रहा है.

धार्मिक और सांस्कृतिक मूर्तियां

सरस्वती जैसी देवी-देवताओं की मूर्तियां भी ब्रिटेन में हैं. ये भारतीय संस्कृति और आस्था से जुड़ी हैं. इनके विदेश में होने से लोगों को भावनात्मक दुख होता है. यह केवल कला नहीं, बल्कि विश्वास का विषय भी है. इसलिए भारत चाहता है कि उससे जुड़ी चीजें ब्रिटेन वापस कर दे.

दुर्लभ पांडुलिपियां- ग्रंथमुगल और शाहजहां का वाइन कप

ब्रिटेन में कई दुर्लभ पांडुलिपियां भी रखी हैं. इनमें संस्कृत और फारसी के कई ग्रंथ शामिल हैं. ये भारत के ज्ञान और परंपरा का हिस्सा हैं. इनका अध्ययन दुनिया भर के शोधकर्ता करते हैं.आगरा का ताज महल और दिल्ली का लाल किला जैसी महत्वपूर्ण इमारतों के निर्माता मुगल बादशाह शाहजहाँ से जुड़ा कीमती बर्तन भी ब्रिटेन के संग्रहालय का हिस्सा है. यह वाइन कप है, जो बेहद कीमती बताया जाता है.

ये वस्तुएं ब्रिटेन कैसे पहुंचीं?

इनमें से अधिकतर वस्तुएं औपनिवेशिक दौर में ब्रिटेन पहुंचीं. उस समय भारत पर अंग्रेजों का शासन था. कई चीजें युद्ध के बाद ली गईं. कुछ को संधि या उपहार के रूप में ले जाया गया. लेकिन कई मामलों में यह प्रक्रिया न्यायपूर्ण नहीं थी.

भारत की वापसी की मांग, क्या बोला ब्रिटेन?

भारत लंबे समय से इन वस्तुओं की वापसी की मांग कर रहा है. सरकार और विशेषज्ञ इसे ऐतिहासिक न्याय का मुद्दा मानते हैं. उनका कहना है कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है. हर हाल में ये ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं भारत को मिलनी चाहिए.

ब्रिटेन के संग्रहालय अलग तर्क देते हैं. वे कहते हैं कि वे इन वस्तुओं की अच्छी देखभाल करते हैं. उनका मानना है कि ये अब वैश्विक धरोहर हैं. इसलिए इन्हें वहीं रहना चाहिए, जहां दुनिया के लोग इन्हें देख सकें.

कई देशों ने अपनी चीजें लीं वापस

कुछ विशेषज्ञ बीच का रास्ता सुझाते हैं. वे कहते हैं कि दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है. कुछ वस्तुएं वापस दी जा सकती हैं. कुछ को लंबे समय के लिए उधार पर दिया जा सकता है. दुनिया के कई देश अपनी धरोहर वापस मांग रहे हैं. ग्रीस, मिस्र और नाइजीरिया ने भी ऐसे प्रयास किए हैं. कुछ मामलों में उन्हें सफलता मिली है. इससे भारत की मांग को भी बल मिलता है.

सरल शब्दों में कहें तो यह मुद्दा केवल वस्तुओं का नहीं है. यह इतिहास, सम्मान और पहचान से जुड़ा है. कोहिनूर एक प्रतीक है, लेकिन असली सवाल उससे बड़ा है. क्या सांस्कृतिक धरोहरों को उनके मूल देश को वापस किया जाना चाहिए? इसका सपाट जवाब हो सकता है-हां. पर, यह इतना आसान नहीं है. कई कानूनी पेंच भी है. कुछ तर्क तो कुछ कुतर्क भी हैं. पर, ममदानी जैसे भारतीय मूल के लोग आवाज उठाते रहेंगे तो तय है कि भारत सरकार की मांग पर असर जरूर पड़ेगा. भविष्य में इसका समाधान जरूर निकलेगा.