देश के सीमावर्ती गांव पर मोदी सरकार का पहला ध्यान है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि जिन सीमावर्ती गांवों को कभी देश का आखिरी गांव मानकर उपेक्षित छोड़ दिया गया था, सरकार अब वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत उन्हें देश का पहला गांव मानकर विकसित कर रही है।
नई दिल्ली में आयोजित सीमा सड़क संगठन रणनीतिक बुनियादी ढांचा सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सड़क, रेल, हवाई मार्ग और डिजिटल बुनियादी ढांचे के माध्यम से देश के सुदूर क्षेत्रों को जोड़ने के लिए पूरी दृढ़ता से काम कर रही है ताकि अंतिम छोर पर बैठा नागरिक मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करे।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यद्यपि आज हमारी सेनाओं में अत्याधुनिक हथियारों और आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्मों को शामिल किया जा रहा है, फिर भी बंदरगाह, हवाई पट्टियां, सड़कें और सुरंगें भविष्य के युद्धों में अपरिहार्य भूमिका निभाती रहेंगी। उन्होंने बुनियादी ढांचे के निर्माण को सीधे तौर पर राष्ट्र की संप्रभुता से जोड़ते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बिंदु रेखांकित किया। कई बार युद्ध का पहला मोर्चा सीमा रेखा पर नहीं, बल्कि उस सड़क पर होता है जो हमारे सैनिकों को अग्रिम पंक्ति तक लेकर जाती है। इसलिए, उस सड़क का निर्माण करने वाला व्यक्ति भी राष्ट्रीय सुरक्षा का उतना ही महत्वपूर्ण रक्षक है, जितना कि सीमा पर तैनात सैनिक।
राजनाथ सिंह ने बीआरओ की सराहना करते हुए कहा कि पिछले साढ़े छह दशकों में इस संगठन ने खुद को एक सामान्य सड़क निर्माण एजेंसी से बदलकर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित रणनीतिक बुनियादी ढांचा संगठनों में से एक के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने अटल टनल, उमलिंग ला दर्रा और सेला टनल जैसी दुर्गम परियोजनाओं को बीआरओ के कठिन परिश्रम और असाधारण क्षमता का जीवंत प्रमाण बताया।
रक्षा मंत्री ने कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में बीआरओ द्वारा अपनाई जा रही टनलिंग (सुरंग निर्माण) जैसी आधुनिक तकनीकों की गति को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह इंसानी हौसले और आधुनिक तकनीक के सटीक तालमेल का परिणाम है। इस दो दिवसीय सम्मेलन (जो बुधवार को शुरू हुआ था) में उभरती प्रौद्योगिकियों, उन्नत इंजीनियरिंग समाधानों और टिकाऊ निर्माण पद्धतियों पर गहन मंथन हुआ।
समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली विभिन्न बीआरओ परियोजनाओं को पुरस्कार प्रदान किए। साथ ही, संगठन के आधुनिकीकरण को आगे बढ़ाते हुए दो नए डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए, जो परियोजना प्रबंधन और भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाएंगे। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के साथ-साथ अन्य सीमावर्ती राज्यों में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत हो रहा यह विकास विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।