पुरानी मान्यता अब वैज्ञानिक सोच से खारिज हो गयी
मध्य अमेरिका का प्राचीन शहर था यह
प्राचीन साक्षों की गहन जांच का परिणाम
शायद व्यवस्था के धराशायी होने से हुआ
राष्ट्रीय खबर
रांचीः मध्य अमेरिका के निचले मैदानी इलाकों में 750 से 900 ईस्वी के बीच माया सभ्यता की आबादी और राजनीतिक शक्ति में भारी गिरावट देखी गई। वर्षों से शोधकर्ता इस पतन का मुख्य कारण भीषण सूखे के दौर को मानते रहे हैं। लंबे समय तक वैज्ञानिक सोच पर इसी तर्क का दबदबा रहा, लेकिन 3,300 साल पुराने तलछट रिकॉर्ड पर आधारित नए निष्कर्ष बताते हैं कि यह कहानी केवल जलवायु संकट तक सीमित नहीं है।
यूनिवर्सिटी ऑफ मॉन्ट्रियल के भूगोल प्रोफेसर बेंजामिन ग्विनेथ, जो माया सभ्यता पर पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं, ने वर्तमान ग्वाटेमाला में स्थित इट्ज़न पुरातात्विक स्थल की जांच की है। ग्विनेथ और उनकी टीम ने लगुना इट्ज़न झील के तलछट नमूनों का विश्लेषण कर इस क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों और पर्यावरणीय स्थितियों का एक लंबा रिकॉर्ड तैयार किया।
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आश्चर्यजनक रूप से, परिणामों से पता चला कि जिस दौरान माया आबादी में गिरावट आई, उस समय इट्ज़न में सूखे के कोई संकेत नहीं थे। इसके बावजूद, स्थानीय आबादी लगभग उसी समय खत्म हो गई जब ग्वाटेमाला और मैक्सिको के अन्य हिस्सों में सूखे के कारण बस्तियां उजड़ रही थीं।
तलछट से मिले सुराग इस गुत्थी को सुलझाने के लिए शोधकर्ताओं ने तीन प्रकार के भू-रासायनिक संकेतकों की जांच की: पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (आग की तीव्रता के लिए), लीफ वैक्स (वनस्पति और वर्षा के पैटर्न के लिए), और फिकल स्टैनोल (आबादी के आकार के आकलन के लिए)। इनसे पता चला कि 3,200 साल पहले यहाँ पहली स्थायी बस्तियाँ बनी थीं। प्री-क्लासिक काल (3,500 से 2,000 साल पहले) के दौरान, माया लोग जंगलों को साफ करने और खेती के लिए आग का व्यापक उपयोग करते थे।
कृषि और शहरीकरण में बदलाव क्लासिक काल (1,600 से 1,000 साल पहले) के दौरान डेटा एक बड़ा बदलाव दिखाता है। आबादी का घनत्व काफी बढ़ गया, लेकिन आग का उपयोग कम हो गया। ग्विनेथ के अनुसार, इसका मतलब था कि अधिकांश भूमि पहले ही साफ की जा चुकी थी और माया लोग अब उन्नत कृषि तकनीकों (जैसे कटाव रोकने के लिए मेड़ बनाना) की ओर बढ़ रहे थे। यह क्रमिक शहरीकरण का प्रतीक था।
स्थिर जलवायु और अंतर्संबंध हाइड्रोजन आइसोटोप विश्लेषण से पता चला कि इट्ज़न की जलवायु स्थिर थी क्योंकि यह पर्वतीय क्षेत्र के करीब था जहाँ कैरिबियन धाराओं से नियमित वर्षा होती थी। तो फिर इसका पतन क्यों हुआ? ग्विनेथ बताते हैं कि इसका उत्तर माया समाजों के आपसी जुड़ाव में छिपा है। माया शहर अलग-थलग नहीं थे; वे व्यापार, राजनीति और अर्थव्यवस्था के एक जटिल जाल से जुड़े थे।
जब मध्य निचले इलाकों में सूखा पड़ा, तो उसने संकटों की एक श्रृंखला (जैसे संसाधनों के लिए युद्ध, राजवंशों का पतन और बड़े पैमाने पर पलायन) शुरू कर दी। इट्ज़न स्थानीय सूखे से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय व्यवस्था के बिखरने के कारण धराशायी हुआ। यह शोध दर्शाता है कि माया सभ्यता का पतन किसी एक जलवायु आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि जलवायु, सामाजिक संगठन और राजनीति के आपस में उलझने का परिणाम था।
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