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अपने काम काज और संचालन से संतुष्ट हैं ज्ञानेश कुमार

पश्चिम बंगाल में नहीं होगा दोबारा मतदान

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान के स्तर और शांतिपूर्ण प्रक्रिया ने सबको चकित कर दिया है। 23 अप्रैल को हुए इस मतदान में राज्य ने 92.88 प्रतिशत वोटिंग का एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जो देश के चुनावी इतिहास में विरला ही देखने को मिलता है। भारी उत्साह के बावजूद, पूरी प्रक्रिया में हिंसा का अभाव चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी उपलब्धि बनकर उभरा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इन आंकड़ों पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे लोकतंत्र का उत्सव करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के पहले चरण के सभी 44,376 मतदान केंद्रों पर चुनाव इतने सुचारू और पारदर्शी तरीके से हुए हैं कि कहीं भी पुनर्मतदान कराने की रत्ती भर भी आवश्यकता नहीं पड़ी है। आयोग ने कड़े शब्दों में कहा कि नियमों का पालन इतनी सटीकता से हुआ है कि दोबारा वोटिंग का कोई सवाल ही नहीं उठता।

आयोग की यह सफलता केवल बंगाल तक सीमित नहीं रही। मुख्य चुनाव आयुक्त ने दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के लिए भी इसी तरह के सुखद परिणाम साझा किए। तमिलनाडु के सभी 75,064 मतदान केंद्रों पर भी चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष रहे और वहां भी किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान नहीं कराया जाएगा। आयोग ने इसे अपनी कार्यप्रणाली की जीत बताते हुए कहा कि भयमुक्त, हिंसा मुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त चुनाव का उनका वादा अब हकीकत में बदल चुका है।

निर्वाचन आयोग ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय मुख्य रूप से तीन स्तंभों को दिया है। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल। चुनाव मशीनरी द्वारा तकनीकी और जमीनी स्तर पर सटीक निगरानी। जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अटूट विश्वास और भारी भागीदारी।

पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जो अक्सर चुनावी हिंसा के लिए चर्चा में रहता था, वहां 92 फीसद से अधिक मतदान और जीरो रिपोल की स्थिति को राजनीतिक विशेषज्ञ एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देख रहे हैं। आयोग ने इसे जनता की शक्ति और लोकतंत्र की सामूहिक जीत घोषित किया है।