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रोमानिया में राजनीतिक उथल-पुथल का संकट गहराया

सबसे बड़े दल ने समर्थन वापस लिया

एजेंसियां

बुखारेस्टः रोमानिया एक बार फिर गहरे राजनीतिक संकट की दहलीज पर खड़ा हो गया है। गुरुवार को देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रधानमंत्री इली बोलोन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने की औपचारिक घोषणा कर दी। इस फैसले ने पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता झेल रहे इस बाल्कन देश में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। गौरतलब है कि 465 सीटों वाली रोमानियाई संसद में पीएसडी के पास लगभग 130 सीटें हैं, जो इसे विधायी प्रक्रिया में सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी बनाती हैं।

यह गठबंधन पिछले साल जून में अस्तित्व में आया था, जिसका मुख्य उद्देश्य यूरोपीय संघ समर्थक रुख को मजबूत करना और देश में जारी महीनों की अराजकता को समाप्त करना था। दिसंबर 2024 में हुए राष्ट्रपति चुनावों के दौरान रूसी हस्तक्षेप के गंभीर आरोपों के बाद जब चुनावों को रद्द कर दिया गया था, तब इस गठबंधन को स्थिरता के प्रतीक के रूप में देखा गया था।

हालांकि, यह शांति केवल 10 महीने ही टिक पाई। पीएसडी ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि अब प्रधानमंत्री बोलोन के पास संसदीय बहुमत का समर्थन नहीं है, जिसके कारण वे सरकार के प्रमुख के रूप में अपनी लोकतांत्रिक वैधता खो चुके हैं।

इस दरार का मुख्य कारण आर्थिक नीतियां बनीं। प्रधानमंत्री बोलोन की सरकार ने यूरोपीय संघ में सबसे अधिक बजटीय घाटे को कम करने के लिए करों में वृद्धि जैसे कई कड़े और अलोकप्रिय कदम उठाए थे। इन उपायों ने न केवल आम जनता को प्रभावित किया, बल्कि पीएसडी के पारंपरिक वोट बैंक को भी नुकसान पहुँचाया।

पीएसडी को डर है कि इन अलोकप्रिय आर्थिक फैसलों के कारण उनका आधार धुर दक्षिणपंथी दलों की ओर खिसक रहा है। गुरुवार को अपने रुख को स्पष्ट करते हुए पीएसडी ने कहा कि वे एक नई यूरोपीय समर्थक सरकार का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं, बशर्ते प्रधानमंत्री का चेहरा बदल दिया जाए। वे किसी अन्य राजनेता या तकनीकी विशेषज्ञ के नेतृत्व में काम करने को तैयार हैं।

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री इली बोलोजन ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कई बार दोहराया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे और सरकार का नेतृत्व करना जारी रखेंगे। उन्होंने बाहर निकलने वाले पीएसडी मंत्रियों को उनके 10 महीने के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और उनके स्थान पर अंतरिम मंत्रियों के नामों की घोषणा कर दी है। अब गेंद राष्ट्रपति और संसद के पाले में है, जहाँ आने वाले दिनों में शक्ति प्रदर्शन की संभावना है।