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Bihar Bridge Collapse: तीन बार गिरे सुल्तानगंज पुल में ‘वास्तु दोष’? निर्माण कंपनी अब करवा रही चंडी पाठ और महायज्ञ

बिहार के भागलपुर में सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन पुल तीन बार गिर चुका है. बनाने वाली कंपनी को पंडित ने बताया कि इसके पिलर में वास्तु दोष है. अब कंपनी इस दोष को दूर करने के लिए चंडी पाठ करवा रही है. गंगा नदी पर बन रहा ये पुल निर्माणाधीन रहते हुए तीन बार ताश के पत्तों की तरह धराशाई हो चुका है. 1700 करोड़ की यह परियोजना बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट था. ये पुल भागलपुर को खगड़िया से जोड़ेगा.

अब कंपनी के द्वारा आस्था और इंजीनियरिंग की जुगलबंदी के सहारे पुल निर्माण को जल्द पूरा करने का अनोखा प्रयास किया जा रहा है. सुल्तानगंज स्थित परियोजना परिसर में चंडी पाठ, नवग्रह पूजा और विशेष अनुष्ठान कराए जा रहे हैं. इस पांच दिवसीय अनुष्ठान के लिए काशी से सात पंडितों को बुलाया गया है. इसका उद्देश्य निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करना और कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाना है, जिसमें अधिकारी और कर्मी श्रद्धा के साथ शामिल हुए हैं.

2015 में शुरू हुआ था काम

दरअसल, सुल्तानगंज-अगुवानी पुल के निर्माण की शुरुआत 2015 में हुई थी और इसकी जिम्मेदारी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन कंपनी को दी गई है. निर्माण के दौरान 2022, 2023 और 2024 में तीन बार इस पुल का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और अब सब-स्ट्रक्चर का नया डिजाइन तैयार किया गया है

इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से का रिकंस्ट्रक्शन का कार्य किया जा रहा है. यह फोरलेन पुल लगभग 4 किलोमीटर लंबा बनना है, जिसकी लागत 1700 करोड़ रुपये है. इस पुल का पहला हादसा 3 अप्रैल 2022 को हुआ था, जब सुल्तानगंज की ओर से पाया संख्या चार और छह के बीच का 36 सेगमेंट तेज हवा के झोंके में ताश के पत्तों की तरह ढह गया था.

वहीं 4 जून 2023 को अगुवानी की ओर से पाया संख्या 10, 11, 12 और 13 के बीच 100 मीटर से अधिक का सुपर-स्ट्रक्चर गंगा नदी में समा गया था. तीसरा हादसा अगस्त 2024 में हुआ, जब पाया संख्या 9 का सुपर-स्ट्रक्चर गिर गया था. उद्घाटन की 12 डेडलाइन फेल होने के बाद अब इस पुल को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

की जा रही विश्वकर्मा आराधना

काशी से आए पंडितों में से आचार्य विनोद कुमार तिवारी के अनुसार पुल के पाया में वास्तु दोष हो सकता है. ऐसे में पाया संख्या 5, 10 और 11 के बीच वास्तु दोष निवारण और विश्वकर्मा आराधना की जा रही है. गंगा पूजन और महाआरती के बाद विघ्न निवारण पूजा की जा रही है, ताकि कार्य में निरंतरता बनी रहे.

कंपनी का दावा है कि रीडिजाइन और रिवर्क से कार्य तेज गति से सही दिशा में आगे बढ़ सकता है, वहीं आस्था का साथ भी जरूरी है. आचार्य विनोद तिवारी के अनुसार भगवान पर आस्था और विश्वास से ही हर कार्य पूर्ण होता है. भगवती और भगवान विश्वकर्मा की कृपा से यह पुल जल्द पूरा होगा.

जून तक खड़ा करना है पिलर

प्रोजेक्ट मैनेजर रवि शंकर ने बताया कि जून तक दो पिलर खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी नींव डाली जा चुकी है. नए डिजाइन के तहत मध्य हिस्से में तीन अतिरिक्त पिलर भी प्रस्तावित हैं, जिससे संरचना की मजबूती व प्रगति दोनों में सुधार होगा.

कंपनी का कहना है कि सिमरिया पुल निर्माण में ऐसी अड़चन नहीं आई थी, जबकि यहां बार-बार बाधाएं सामने आ रही हैं. हम लोग तकनीकी कारणों की जांच कर रहे हैं और साथ में भगवान व आस्था का सहारा भी ले रहे हैं. बीते दिन बाबा अजगैबीनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक और गंगा तट पर भव्य महाआरती करवाई गई. अब पांच दिवसीय चंडी पाठ कराया जा रहा है. सुल्तानगंज का गंगा ब्रिज आस्था और इंजीनियरिंग के संगम पर खड़ा है.