Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Gwalior Coaching Fire Safety: ग्वालियर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा राम भरोसे; केवल 3 के पास फायर... MP UCC Draft: मध्य प्रदेश में 10 दिन में तैयार होगा समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट; जानें आदिवासियों ... Gwalior News: डीएलएड परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी का खुलासा; चाचा दे रहा था भतीजे की जगह परीक्षा, प... Terror Module Exposed: भोपाल एटीएस की बड़ी कार्रवाई; 'लोन वुल्फ' मॉड्यूल तैयार करने वाले सरगना की रिम... Mephedrone Drugs Network: भोपाल में ड्रग्स बनाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़; हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ... Seoni Jumbo Sitaphal GI Tag: सिवनी के सीताफल को मिला GI टैग; अब दुनिया भर में बिखेरेगा अपने स्वाद का... Madhya Pradesh Crime: टमाटर बेचने वाले से बहस पड़ गई भारी, लाठी-डंडों से लैस होकर घर में घुसकर की मार... Haryana Corruption Case: 504 करोड़ के बैंक घोटाले में आईएएस पंकज अग्रवाल पर सीबीआई का शिकंजा; 17 आरो... Jharkhand Rajya Sabha Election: इंडिया गठबंधन में बढ़ा घमासान; राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के ... IELTS/TOEFL Exam Scam: गुजरात में बड़ा फर्जीवाड़ा; दीवार में छेद कर डमी छात्रों से पास कराई जाती थी पर...

हंगरी चुनाव में विपक्षी तिस्ज़ा ने बनाई बढ़त

अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद भी हवा उल्टी चल रही

एजेंसियां

बुडापेस्ट: हंगरी में होने वाले संसदीय चुनावों से ठीक पहले प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की सत्ता को पिछले 16 वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को नेप्सज़ावा अखबार में प्रकाशित पब्लिकस इंस्टीट्यूट के एक ताजा जनमत सर्वेक्षण (पॉल) के अनुसार, पीटर मग्यार के नेतृत्व वाली मध्य-दक्षिणपंथी तिस्ज़ा पार्टी सत्तारूढ़ फिडेज़ पार्टी से काफी आगे निकल गई है।

आंकड़ों के मुताबिक, तयशुदा मतदाताओं के बीच तिस्ज़ा पार्टी को 52 फीसद समर्थन मिला है, जबकि ओर्बन की फिडेज़ पार्टी को मात्र 39 फीसद मतदाताओं का साथ मिलता दिख रहा है। सभी मतदाताओं के समग्र सर्वेक्षण में तिस्ज़ा 38 फीसद और फिडेज़ 29 फीसद पर है। हालांकि, करीब 25 फीसद मतदाता अभी भी अनिर्णीत हैं, जिससे रविवार को होने वाले चुनाव का परिणाम अनिश्चित बना हुआ है। पीटर मग्यार, जो कभी सरकार के करीबी थे, अब ओर्बन के सबसे कट्टर प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे हैं।

चुनाव प्रचार के अंतिम दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हंगरी की राजनीति में हस्तक्षेप करते हुए विक्टर ओर्बन का समर्थन किया है। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर वादा किया कि यदि ओर्बन की पार्टी जीतती है, तो वे हंगरी में अमेरिकी आर्थिक शक्ति और निवेश लाएंगे। ट्रम्प प्रशासन लंबे समय से यूरोप में दक्षिणपंथी ताकतों का समर्थन करता रहा है, जो प्रवासन और वोक मूल्यों को एक सभ्यतागत खतरे के रूप में देखते हैं।

दूसरी ओर, ओर्बन ने अपने विरोधियों पर विदेशी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलीभगत और अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हंगरी के लोगों के फैसले पर सवाल उठाने की एक संगठित कोशिश है। ओर्बन, जिनके रूस और ट्रम्प के साथ करीबी संबंध रहे हैं, पर यूरोपीय संघ अक्सर लोकतंत्र और कानून के शासन को कमजोर करने का आरोप लगाता रहा है, जिसके कारण हंगरी की अरबों यूरो की फंडिंग भी रोकी गई है। अब सारा दारोमदार रविवार को होने वाले मतदान पर टिका है।