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बंगाल में सत्ता में आते ही घुसपैठियों को भगायेंगेः शाह

असम के पाथरकांडी में गृह मंत्री की विशाल जनसभा

  • कांग्रेस पर अपना पुराना आरोप दोहराया

  • घुसपैठिये असम और त्रिपुरा में भी हैं

  • मोदी सरकार पूर्वोत्तर पर गंभीर रही है

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटीः असम के पाथरकांडी में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए भाजपा के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन अब केवल समय की बात है और राज्य की जनता तृणमूल कांग्रेस के शासन से ऊब चुकी है। शाह ने एक बड़ा चुनावी वादा करते हुए घोषणा की कि जैसे ही बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी, राज्य में रह रहे सभी अवैध घुसपैठियों को चिन्हित कर उनके देशों में वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की पिछली नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने दशकों तक अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए असम की बराक घाटी में अवैध प्रवासियों को न केवल पनाह दी, बल्कि उन्हें सरकारी संरक्षण भी प्रदान किया। शाह के अनुसार, इसी नीति के कारण आज श्रीभूमि (पूर्ववर्ती करीमगंज), सिलचर और कछार जैसे सीमावर्ती जिलों की जनसांख्यिकी प्रभावित हुई है और वहां अवैध प्रवासी प्रभावी भूमिका में आ गए हैं।

उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस इसका विरोध केवल इसलिए कर रही है क्योंकि वे जानते हैं कि यह कानून वास्तविक शरणार्थियों को नागरिकता देगा और घुसपैठियों के लिए दरवाजे बंद कर देगा। शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा की सरकार न केवल बंगाल, बल्कि असम और त्रिपुरा से भी हर एक घुसपैठिये को बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

गृह मंत्री ने असमिया अस्मिता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा जाति (समुदाय), माटी (भूमि) और भेटी (आधार) की रक्षा के अपने वादे पर कायम है। उन्होंने स्थानीय भावनाओं को छूते हुए करीमगंज का नाम बदलकर श्रीभूमि करने के फैसले का बचाव किया। कांग्रेस नेतृत्व पर निजी हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जिनकी जड़ें इटली में हैं, वे भारतीय भूमि और नाम परिवर्तन के सांस्कृतिक महत्व को कभी नहीं समझ पाएंगे। अंत में, उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा भाषाई सम्मान की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने गर्व से उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असमिया और बंगाली दोनों को शास्त्रीय भाषाओं का दर्जा दिया गया है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध विरासत के प्रति केंद्र की संवेदनशीलता को दर्शाता है।