आईआईटी बॉम्बे ने कचरे से कंचन बनाने की विधि बनायी
- क्या है इसकी तकनीक और कार्यप्रणाली
- प्रभाव और बचत के आंकड़े भी दिखाये हैं
- पर्यावरण और भविष्य की राह में कदम
राष्ट्रीय खबर
रांचीः भारत के प्रमुख तकनीकी संस्थान, आईआईटी बॉम्बे ने टिकाऊ ऊर्जा और कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने कैंपस के भीतर एकत्रित होने वाले सूखे पत्तों और जैविक कचरे को प्रभावी ढंग से बायो-फ्यूल (जैव-ईंधन) में बदलने के लिए बायोमास गैसीफिकेशन तकनीक का सफल प्रयोग किया है। यह नवाचार न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद किफायती साबित हो रहा है।
देखें इससे संबंधित वीडियो
आमतौर पर सूखे पत्तों को जला दिया जाता है या उन्हें सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं। आईआईटी बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने एक थर्मो-केमिकल प्रक्रिया का उपयोग किया है। इस प्रक्रिया में सूखे पत्तों को नियंत्रित ऑक्सीजन और उच्च तापमान पर एक गैसीफायर के भीतर गर्म किया जाता है।
इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप सिनगैस उत्पन्न होती है, जो हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन का मिश्रण है। इस गैस को शुद्ध करके सीधे खाना पकाने या बिजली पैदा करने के लिए उपयोग किया जा सकता है। संस्थान ने इस तकनीक को अपनी विशाल कैंटीन और मेस सुविधाओं के साथ एकीकृत किया है।
प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, इस स्वदेशी तकनीक के कार्यान्वयन से संस्थान की रसोई में उपयोग होने वाली एलपीजी (LPG) की खपत में 30 से 40 प्रतिशत तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। कैंपस से रोजाना निकलने वाले लगभग 2 से 3 टन सूखे पत्तों का अब शत-प्रतिशत सदुपयोग हो रहा है।
यह परियोजना जीरो वेस्ट कैंपस के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर है। शोध दल के अनुसार, इस मॉडल को नगर पालिकाओं और बड़े आवासीय परिसरों में भी लागू किया जा सकता है। इससे दोहरे फायदे होंगे: पहला, लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम होगी, और दूसरा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए, जहाँ पराली जलाना एक बड़ी समस्या है, यह तकनीक छोटे स्तर पर समाधान प्रदान करने की अपार क्षमता रखती है।
#बायोफ्यूल, #आईआईटीबॉम्बे, #नवीकरणीयऊर्जा, #कचराप्रबंधन, #स्वच्छभारत #Biofuel, #IITBombay, #RenewableEnergy, #WasteManagement, #GreenTech