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प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का रांची में निधन

नक्सलवाद की पिछली पीढ़ी का एक और नेता दिवंगत

  • स्वास्थ्य बिगड़ना और अंतिम क्षण

  • सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया

  • माओवादी संगठन में कद और प्रभाव

राष्ट्रीय खबर

रांचीः प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के वरिष्ठ नेता और दिग्गज रणनीतिकार प्रशांत बोस, जिन्हें संगठन के भीतर किशन दा के नाम से जाना जाता था, का शुक्रवार को रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। 80 वर्ष से अधिक आयु के बोस लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी मृत्यु को माओवादी आंदोलन के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है।

सराइकेला जेल में बंद प्रशांत बोस की स्थिति शुक्रवार तड़के अचानक बिगड़ गई। जेल प्रशासन के अनुसार, सुबह लगभग 5 बजे उन्होंने सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई की शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए, उन्हें कड़े सुरक्षा घेरे में सुबह करीब 6 बजे रिम्स अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन उनके शरीर ने उपचार के प्रति कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। अंततः सुबह लगभग 10 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

प्रशांत बोस के कद और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है। जेल और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए एक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई है। शव का पोस्टमार्टम विशेषज्ञों की टीम द्वारा किया जा रहा है, ताकि मृत्यु के सटीक कारणों का आधिकारिक दस्तावेजीकरण हो सके।

मूल रूप से पश्चिम बंगाल के निवासी प्रशांत बोस को भाकपा (माओवादी) के भीतर सर्वोच्च नेताओं में गिना जाता था। वे संगठन के महासचिव नंबाला केशव राव के बाद दूसरे सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते थे। वे संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो के सक्रिय सदस्य होने के साथ-साथ ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के सचिव पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। करीब चार दशकों तक भूमिगत रहकर उन्होंने मनीष और बुद्धा जैसे छद्म नामों से संगठन का विस्तार किया। उन्हें एक कुशल रणनीतिकार और विचारधारा का मार्गदर्शक माना जाता था, जिसने झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा सहित कई राज्यों में माओवादी गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए प्रशांत बोस एक बड़ी चुनौती थे, जिनकी गिरफ्तारी पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उन्हें 12 नवंबर 2021 को सराइकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास से उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बोस पर झारखंड, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में 200 से अधिक हिंसक वारदातों में शामिल होने या उनकी योजना बनाने के आरोप थे। बोस के निधन के बाद, एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।