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भारतीय सेना पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच हो

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को जारी किया नोटिस

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय सेना के एक सेवारत अधिकारी द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो, केंद्र सरकार और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अपनी प्रतिक्रिया दाखिल करने का निर्देश दिया है और मामले की अगली सुनवाई 19 मई के लिए तय की है।

यह याचिका लेफ्टिनेंट कर्नल सुमित श्योराण द्वारा दायर की गई है, जो वर्तमान में सेना में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी याचिका में सेना के अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है। लेफ्टिनेंट कर्नल श्योराण का दावा है कि जब वे नई दिल्ली में तैनात थे, तब उन्होंने वार्षिक आकस्मिक अनुदान के तहत की गई खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश किया था।

याचिका के अनुसार, सार्वजनिक धन का दुरुपयोग खरीद प्रक्रियाओं में हेरफेर, फर्जी रिकॉर्ड बनाने और सरकारी संपत्ति के डायवर्जन के माध्यम से किया गया। यह आरोप लगाया गया है कि सरकारी पैसे से खरीदी गई वस्तुओं को गलत तरीके से अधिकारियों के मेस की संपत्ति के रूप में दिखाया गया। इसके अलावा, जांच से बचने के लिए खरीद सीमा को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित किया गया ताकि उच्च अधिकारियों की मंजूरी की आवश्यकता न पड़े।

लेफ्टिनेंट कर्नल श्योराण ने बताया कि उन्होंने सितंबर 2024 से इन अनियमितताओं के खिलाफ दस्तावेजी सबूतों के साथ कई शिकायतें दर्ज कराई थीं। हालांकि, उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा जानबूझकर इन शिकायतों को दबा दिया गया क्योंकि जिन लोगों के खिलाफ शिकायत थी, वे उसी कमांड संरचना का हिस्सा थे जिन्हें कार्रवाई करनी थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता को चुप कराने के लिए उनका स्थानांतरण नागपुर कर दिया गया और उनके प्रदर्शन की प्रतिकूल रिपोर्ट तैयार की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके कंप्यूटर सिस्टम के साथ अनधिकृत छेड़छाड़ की गई, जो एक लक्षित साइबर हमले का संकेत देता है।

पर्वतारोही और सैन्य अधिकारी श्योराण ने जनवरी 2025 में सीबीआई को भी विस्तृत शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। अदालत में याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता अंकुर मलिक ने रखा, जबकि सीबीआई का प्रतिनिधित्व विशेष लोक अभियोजक रजनी गुप्ता ने किया। केंद्र सरकार की ओर से स्थायी वकील इश्ककरण सिंह भंडारी पेश हुए। अब सभी की निगाहें 19 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहाँ सरकार और जांच एजेंसियों को इन गंभीर आरोपों पर अपना पक्ष रखना होगा।