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Baisakhi 2026: बैसाखी पर पाकिस्तान जाएंगे 3000 भारतीय सिख श्रद्धालु, ननकाना साहिब और लाहौर के करेंगे दर्शन।

अगले महीने यानी अप्रैल में 3000 भारतीयों का एक जत्था पाकिस्तान जाएगा. बैखासी के पावन पर्व पर होने वाली ये यात्रा 10 अप्रैल से शुरू होगी. इस दौरान वे कई ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे. यात्रा का मुख्य आकर्षण 14 अप्रैल को आयोजित होने वाला कार्यक्रम होगा, जो पंजा साहिब गुरुद्वारे में मनाया जाएगा. पाकिस्तान सरकार और संबंधित संस्थाओं ने इस यात्रा को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं.

दरअसल, बैसाखी के पावन पर्व पर इस बार भी आस्था की एक बड़ी यात्रा सीमा पार जाने वाली है. भारत से करीब 3000 सिख श्रद्धालु पाकिस्तान जाकर अपने धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे. ये यात्रा हर साल आयोजित होती है, लेकिन इस बार भी इसे लेकर खास उत्साह और तैयारियां देखने को मिल रही हैं. ये जगह सिख धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और बैसाखी के मौके पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं. इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के प्रवक्ता गुलाम मोहियुद्दीन ने पीटीआई को बताया कि बैसाखी उत्सव के सिलसिले में भारत से सिख तीर्थयात्री यहां आ रहे हैं. इसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है. पिछले दिनों लाहौर स्थित पंजाब गृह विभाग में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई.

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम

पीटीआई रिपोर्ट के मुताबिक, प्रांतीय मंत्री ख्वाजा सलमान रफीक और प्रांतीय मंत्री पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार रमेश सिंह अरोरा बैठक में उपस्थित थे. ईटीपीबी के अतिरिक्त सचिव (श्राइन) नासिर मुश्ताक ने तीर्थयात्रियों के लिए की गई व्यवस्थाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी. बताया गया कि भारत और दुनिया भर से सिख तीर्थयात्री बैसाखी उत्सव में भाग लेंगे. इस दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए जाएंगे. इसके अलावा मेडिकल सुविधाएं, बेहतर परिवहन और ठहरने की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

कई धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे श्रद्धालु

द्विपक्षीय समझौते के तहत, भारत से 3,000 तीर्थयात्री 10 अप्रैल को पाकिस्तान पहुंचेंगे. इस दौरान श्रद्धालुओं के लिए खास तौर पर कई धार्मिक स्थलों का दौरा तय किया गया है. जिसमें तीर्थयात्री ननकाना साहिब, फारूकाबाद, शेखूपुरा, करतारपुर , एमिनाबाद और लाहौर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों का दर्शन करेंगे. तीर्थयात्रियों के लिए पुख्ता सुरक्षा, चिकित्सा सुविधाएं और परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी. ये सभी स्थल सिख धर्म के इतिहास और परंपरा से जुड़े हुए हैं और हर साल हजारों लोग यहां पहुंचते हैं.

पाकिस्तान की सकारात्मक छवि पेश करने का दावा

सरदार रमेश सिंह अरोरा ने इस बात पर जोर दिया कि बैशाखी के जरिए पाकिस्तान की सकारात्मक छवि को दुनिया के सामने पेश किया जाएगा. पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ख्वाजा सलमान रफीक ने कहा कि पंजाब सरकार अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का उनकी परंपराओं के अनुसार पूर्ण आतिथ्य सत्कार करेगी और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और आरामदायक प्रवास सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था कर रही है.

क्यों मनाई जाती है बैसाखी?

बैसाखी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि फसल कटाई के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है. सिख समुदाय के लिए यह दिन खास महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना हुई थी. यही वजह है कि इस मौके पर गुरुद्वारों में विशेष कार्यक्रम और आयोजन होते हैं. पाक अधिकारियों का कहना है कि ये यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों को मजबूत करने का भी एक जरिया है. हर साल इस तरह की यात्राएं दोनों देशों के लोगों को करीब लाने में मदद करती हैं.

पाक-अफगान तनाव का यात्रा पर असर

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जारी तनाव का असर इस बार बैसाखी मनाने पाकिस्तान जाने वाले सिख जत्थे पर भी पड़ा है. पाक जाने वाले श्रद्धालुओं में यह डर है कि ऐसे माहौल में कहीं वे वहां फंस न जाएं. इसी कारण इस बार बीते साल के मुकाबले 50 प्रतिशत से भी कम वीजा अप्लाई हुए हैं. पिछले वर्ष 6,751 ने वीजा के लिए आवेदन किया था और 3,751 को ही वीजा जारी किया गया था. वहीं, इस बार अब तक 3000 ने ही आवेदन किया है.