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हमारे राज में दस हजार ने हथियार डालेः अमित शाह

कांग्रेस के शासनकाल में लगातार अशांत बना हुआ था असम

  • असम से हर घुसपैठिए की पहचान कर हटाएंगे

  • उखरुल में एनएससीएन-आईएम ऑफिस में आग

  • मणिपुर के उखरुल में चार उग्रवादियों की हत्या

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर भारत इस समय राजनीतिक हलचलों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के केंद्र में है। एक ओर जहां असम में चुनावी बिगुल फूंकते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान किया है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्य मणिपुर के उखरुल में उग्रवादी गुटों के आपसी संघर्ष के बाद भड़की हिंसा ने तनाव पैदा कर दिया है।

असम के सोनितपुर में एक विशाल चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने घुसपैठ को राज्य की सबसे बड़ी समस्या बताया। उन्होंने जनता से शांतिपूर्ण, विकसित और घुसपैठ मुक्त असम के लिए वोट देने की अपील की। शाह ने संकल्प लिया कि अगले 5 वर्षों में भाजपा सरकार हर अवैध घुसपैठिए की पहचान करेगी और उन्हें राज्य से बाहर निकालेगी।

उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी दल केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को संरक्षण दे रहा है। शाह ने गौरव गोगोई और राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि वे मतदाता सूचियों से अवैध नाम हटाने का विरोध क्यों कर रहे हैं? गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में असम को आतंकवाद मुक्त करने और 10,000 युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने की उपलब्धि को भी रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने गोपीनाथ बोरदोलोई और भूपेन हजारिका को लंबे समय बाद भारत रत्न मिलने का जिक्र कर कांग्रेस की कथित उपेक्षापूर्ण नीतियों की आलोचना की।

असम में चुनावी शोर के बीच मणिपुर के उखरुल और कामजोंग जिलों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। कामजोंग के होंगबेई गांव में एक प्रतिद्वंद्वी समूह ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम के चार कैडरों की गोली मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने उखरुल स्थित इस संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय में आग लगा दी।

भीड़ का आरोप था कि संगठन के ही कुछ सदस्य इस आंतरिक कलह और हत्याओं में शामिल हैं। हालांकि, एनएससीएन- आई एम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए आंतरिक जांच शुरू कर दी है। क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर शांति बहाली और विकास कार्यों पर चर्चा की है।