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कुवैत के हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला हुआ

पहले ही झटके में वहां लगा रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त

दोहाः ईरान के साथ बढ़ते क्षेत्रीय संघर्ष की तपिश अब खाड़ी देशों के नागरिक बुनियादी ढांचों तक पहुँचने लगी है। शनिवार को कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर कई ड्रोन हमले किए गए। कुवैत की आधिकारिक समाचार एजेंसी कुना ने देश के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के हवाले से बताया कि इन हमलों में हवाई अड्डे के रडार सिस्टम को गंभीर क्षति पहुँची है। राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई घायल हुआ।

नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के प्रवक्ता ने बाद में स्पष्ट रूप से इन हमलों के लिए ईरान, उसके छद्म संगठनों और उसके द्वारा समर्थित सशस्त्र गुटों को जिम्मेदार ठहराया। यह हमला पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसक सिलसिले की अगली कड़ी है। कुवैत के अग्निशमन विभाग के अनुसार, बुधवार को हुए एक पिछले ड्रोन हमले के कारण हवाई अड्डे के ईंधन टैंकों में भीषण आग लग गई थी। इस आग पर काबू पाने के लिए दमकल कर्मियों को लगातार 58 घंटों तक कठिन अभियान चलाना पड़ा, जिसके बाद शनिवार को इसे पूरी तरह बुझाया जा सका।

जैसे-जैसे ईरान के साथ युद्ध का दायरा बढ़ रहा है, तेहरान ने न केवल इजरायल पर सीधे हमले किए हैं, बल्कि उन खाड़ी अरब देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इस युद्ध के कारण पूरे मध्य पूर्व में कई मोर्चे खुल गए हैं। एक ओर इजरायल, लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्ला लड़ाकों को निशाना बना रहा है, वहीं दूसरी ओर यमन के हुती विद्रोहियों ने भी ईरान के समर्थन में इजरायल पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत जैसे देशों के नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाने का उद्देश्य वैश्विक परिवहन और रसद प्रणालियों में व्यवधान पैदा करना है। फिलहाल कुवैत हवाई अड्डे पर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है और रडार प्रणाली की मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है ताकि विमानों का आवागमन सामान्य किया जा सके। यह घटना दर्शाती है कि मध्य पूर्व का यह युद्ध अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर आम नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय यात्रा मार्गों पर भी पड़ रहा है।