Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
आई एजेंट्स ने साइबर सुरक्षा टेस्टिंग के दौरान बनाई फर्जी ऑनलाइन पहचान, यूके AI सिक्योरिटी इंस्टीट्यू... सावन में गूंज रहे 'हर-हर महादेव' के जयकारे, डिंडौरी के ऋण मुक्तेश्वर धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं का सै... तंदुरुस्त दिखने वाले बॉडीबिल्डर क्यों हो रहे अचानक अकाल मृत्यु के शिकार? 2025 के आंकड़े डरा रहे दिल्ली-एनसीआर में 10 अगस्त तक थमने वाली नहीं बारिश! यूपी, बिहार और एमपी में अति भारी वर्षा का अलर्ट ... केरल और असम में बारिश-बाढ़ का तांडव: केरल में 25 और असम में 87 मौतें; 8 जिलों में रेड अलर्ट जारी आवारा कुत्तों व मवेशियों की समस्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी सरकार को 2 हफ्ते में व्यापक एक्शन... गिरिडीह में आसमानी बिजली का कहर! 4 मासूम बच्चों समेत 5 लोगों की दर्दनाक मौत, क्षेत्र में शोक की लहर महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल के संकेत! मंत्रियों की ढिलाई पर भड़के एकनाथ शिंदे, संगठन विस्त... भोपाल जंगल सोना-कैश कांड: पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से मिली जमानत, 18 महीने बा... सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा ईंधन, नए वाह...

पचास सालों से अनसुलझा था यह खगोलीय रहस्य

विशालकाय लाल तारों की जानकारी निकली

  • क्या था 50 साल पुराना रहस्य?

  • सुपर कंप्यूटर से जानकारी मिली

  • ब्रह्मांड भी रिसाइकिल करती है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः खगोल भौतिकी के क्षेत्र में हाल ही में एक ऐसी गुत्थी को सुलझा लिया गया है जिसने वैज्ञानिकों को पिछले पांच दशकों से उलझा रखा था। यह रहस्य लाल विशालकाय तारों के आंतरिक संचालन और उनके द्वारा ब्रह्मांड में फैलाए जाने वाले तत्वों से जुड़ा है। हालिया शोध और सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन ने स्पष्ट किया है कि इन विशाल तारों के गहरे गर्भ से भारी तत्व उनकी बाहरी सतह तक कैसे पहुँचते हैं।

देखें इससे संबंधित वीडियो

जब कोई तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुँचता है और लाल विशालकाय बनता है, तो उसके केंद्र में भारी तत्वों (जैसे कार्बन, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन) का निर्माण होता है। खगोलविदों ने दशकों पहले देखा था कि ये तत्व किसी न किसी तरह तारे की सतह पर आ जाते हैं और फिर तारकीय हवाओं के माध्यम से अंतरिक्ष में फैल जाते हैं। यही तत्व बाद में नए ग्रहों और जीवन के आधार बनते हैं।

दिक्कत यह थी कि भौतिकी के पुराने मॉडल यह समझाने में असमर्थ थे कि तारे के शांत आंतरिक परतों को पार करके ये तत्व ऊपर कैसे आते हैं। इस प्रक्रिया को डीप मिक्सिंग कहा जाता है, लेकिन इसके पीछे की सटीक कार्यप्रणाली एक पहेली बनी हुई थी।

अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटरों के प्रयोग से वैज्ञानिकों ने तारे के त्रि-आयामी (3 डी) मॉडल तैयार किए। शोध में पाया गया कि यह प्रक्रिया थर्मोहेलिन मिक्सिंग के समान है, जो पृथ्वी के महासागरों में नमक और तापमान के अंतर के कारण होती है।

तारे के भीतर, जब हीलियम का संलयन होता है, तो वह एक अस्थिर परत बनाता है। यह परत अंगुलियों के आकार की संवहन धाराओं का निर्माण करती है, जो रासायनिक रूप से समृद्ध सामग्री को नीचे से ऊपर की ओर धकेलती हैं। यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि ब्रह्मांड में हम जो कार्बन या ऑक्सीजन देखते हैं, उसका वितरण केवल विस्फोट से नहीं, बल्कि इन शांत दिखने वाले विशाल तारों की आंतरिक हलचल से भी होता है।

इस शोध ने न केवल तारों के विकास के मॉडल को सुधारा है, बल्कि यह भी स्पष्ट किया है कि सूर्य जैसे तारे अपने जीवन के अंत में किस तरह व्यवहार करेंगे। यह खोज प्रमाणित करती है कि ब्रह्मांड एक विशाल पुनर्चक्रण मशीन है, जहाँ मरते हुए तारे अपनी राख से भविष्य की पीढ़ियों के लिए बीज बोते हैं।

#खगोलविज्ञान, #अंतरिक्षविज्ञान, #लालविशालकायतारा, #ब्रह्मांडकेरहस्य, #विज्ञानसमाचार #Astronomy, #SpaceScience, #RedGiantStar, #CosmicSecrets, #ScienceNews