Breaking News in Hindi

ईडी का भय दिखाकर धनखड़ से इस्तीफा लिया

संजय राउत की पुस्तक से भड़की आगे सुलगती जा रही

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत की हालिया प्रकाशित पुस्तक अनलाइकली पैराडाइज ने राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद छेड़ दिया है। इस किताब में देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर किए गए सनसनीखेज दावों ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राउत ने अपनी पुस्तक में तर्क दिया है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का पिछले साल (2025) पद छोड़ना महज स्वास्थ्य कारणों से नहीं था, जैसा कि आधिकारिक तौर पर बताया गया था। किताब के अनुसार, धनखड़ प्रवर्तन निदेशालय के भारी दबाव में थे। दावा किया गया है कि धनखड़ द्वारा लिए गए कुछ स्वतंत्र राजनीतिक निर्णयों से मोदी सरकार असहज थी।

इसी के प्रतिशोध में, ईडी ने धनखड़ और उनकी पत्नी द्वारा जयपुर स्थित संपत्ति बेचकर विदेश पैसा भेजने के आरोपों से जुड़ी एक फाइल तैयार की थी। राउत का आरोप है कि इसी फाइल का डर दिखाकर उन्हें पद से हटने पर मजबूर किया गया।

किताब में पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के प्रकरण का भी विस्तार से उल्लेख है। राउत लिखते हैं कि लवासा ने जब प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया, तो उन्हें और उनके परिवार को निशाना बनाया गया। उन पर दबाव डालने के लिए जांच एजेंसियों का सहारा लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप अंततः 2020 में उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

मराठी में मूल रूप से लिखी गई इस किताब के अंग्रेजी संस्करण में संजय राउत ने कई पुरानी राजनीतिक घटनाओं से भी पर्दा उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि गुजरात दंगों के बाद जब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की गिरफ्तारी की संभावना बन रही थी, तब शरद पवार ने कैबिनेट में इसका विरोध कर उन्हें बचाया था।

साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बाल ठाकरे और शरद पवार ने अमित शाह को कानूनी संकट के समय जमानत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कुल मिलाकर, जेल प्रवास के दौरान लिखी गई यह पुस्तक भारतीय राजनीति के उन गुप्त समझौतों और दबाव की राजनीति को रेखांकित करती है, जो अक्सर सार्वजनिक विमर्श से दूर रहती है।